गाजियाबाद के निजी अस्पतालों पर भड़के सीजेआई, नाबालिग निर्भया को इलाज से किया था इनकार
१६ मार्च को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक वयस्क ने ४ साल की बच्ची को चॉकलेट देने के बहाने दूर लेकर उसके साथ दुषकर्म किया और बदहवास स्थिति में छोड़कर भाग गया।
परिजन खून से लथपथ हालत में उस बच्ची को दो प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए जहां डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया। परिजन जब सरकारी अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने बिटिया को मृत घोषित कर दिया।
इतना ही नहीं, स्थानीय पुलिस ने पहले तो प्राथमिकी ही नहीं लिखी और आनाकानी करती रही, स्थानीय लोगों के हंगामे के बाद १७ मार्च को पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और १८ मार्च को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इसमें मुख्य बात यह रही कि पुलिस ने पोस्को और धारा ३७६ भी नहीं जोड़ी थी।
मुख्य न्यायाधीश , सर्वोच्च न्यायालय ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन डॉक्टरों ने इलाज से इनकार कर दिया , वह अपने नाम के आगे से डॉक्टरों शब्द हटा लें, आपको कोई हक नहीं कि आप डॉक्टर ,नाम के आगे लगाएं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आगे कहा कि..
आपमे संवेदनशीलता नहीं। आपने क्यों उसका एडमिशन नहीं लिया ? क्या सिर्फ इसलिए कि वह गरीब थी? क्या इसलिए कि वह आपकी फीस नहीं भर सकती थी? यदि आपके पास सुविधा नहीं होती तो आप उसे दूसरे अस्पताल लेकर जाते ,लेकिन आपने ऐसा कुछ नहीं किया?
पीड़ित परिवार को स्वेच्छा से दान कीजिए नहीं तो हम पेनल्टी लगाएंगे।
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