अमेठी के हारीपुर में साहित्य विद डॉक्टर रमाकांत तिवारी द्वारा मृत्यु को कैसे मारें: विषय पर व्याख्यान
अमेठी, उत्तर प्रदेश
मृत्यु पर विजय का मंत्र: कर्म, करुणा और चेतना
हारीपुर की धरती पर डॉ. रमाकांत तिवारी ‘क्षितिज’ ने जगाई वैचारिक ज्योति।
भेंटुआ (अमेठी)। हारीपुर गांव की माटी उस समय विचारों की सुगंध से महक उठी, जब “मृत्यु को कैसे मारें” विषय पर एक गंभीर एवं प्रेरणादायी परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमाकांत तिवारी ‘क्षितिज’ ने की तथा संयोजन राजेंद्र तिवारी , पत्रकार शशि कांत तिवारी पुजारी जिला अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति युवा इकाई ने संभाला।
दीप की लौ के साथ आरंभ हुई इस गोष्ठी में जीवन और मृत्यु के शाश्वत सत्य पर गहन मंथन हुआ। शब्दों में संवेदना थी, विचारों में तप था और वातावरण में आत्मबोध की आभा।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रमाकांत तिवारी ‘क्षितिज’ ने कहा, “मृत्यु को मारना संभव नहीं, किंतु उसे अर्थहीन अवश्य किया जा सकता है। जब मनुष्य अपने कर्म, करुणा और सृजन से समाज में प्रकाश फैलाता है, तब वह देह से भले विदा हो जाए, किंतु स्मृतियों और संस्कारों में जीवित रहता है।”
डॉ. तिवारी केवल शब्दों के साधक ही नहीं, बल्कि कर्म के भी उपासक हैं। वर्तमान में मुंबई में निवास करते हुए भी उनका हृदय अपनी जन्मभूमि से गहराई से जुड़ा है। वे प्रति वर्ष गांव में आकर सामाजिक, शैक्षिक एवं वैचारिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। यही नहीं, मुंबई में भी वे साहित्यिक एवं सामाजिक आयोजनों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य करते रहते हैं।
उनकी साहित्यिक एवं सामाजिक सेवाओं के लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार द्वारा राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तित्व की गरिमा को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्र का नाम भी रोशन करता है।
राजेंद्र तिवारी (संयोजक) ने कहा, “डॉ. क्षितिज के विचार हमें जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाने की प्रेरणा देते हैं। समाज के लिए किया गया हर कार्य व्यक्ति को अमरत्व की ओर ले जाता है।”
डॉ. रमाकांत तिवारी ‘क्षितिज’ ने कहा, “मृत्यु शरीर का अंत है, पर विचारों का नहीं। आत्मबोध और सत्कर्म ही जीवन की सच्ची उपलब्धि हैं।”
भोला सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा, “जो समाज के लिए जीता है, वही इतिहास में दर्ज होता है।”
गोष्ठी में महात्मा तिवारी, बल्लू तिवारी, मिथलेश तिवारी, राकेश तिवारी, घनश्याम तिवारी, अजय सिंह, प्रकाश तिवारी, राम संजीवन तिवारी, उमाशंकर सिंह, अंशू उपाध्याय, रंजीत शर्मा (पूर्वांचल प्रदेश उपाध्यक्ष, भाकियू लोकशक्ति), महेंद्र शुक्ला, अमर यादव (वार्ड 32 डीडीसी प्रत्याशी), पुजारी तिवारी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
अंत में उपस्थित जनसमूह ने यह संकल्प लिया कि जीवन को सेवा, संस्कार और सृजन से जोड़कर ही मृत्यु पर वास्तविक विजय प्राप्त की जा सकती है।
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