हमे गर्व है, हमारा बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ, लेकिन हमने बहुत भारी कीमत चुकाई है: श्रीराम नाईक
मुंबई के घाटकोपर के कामराज नगर स्थित एक स्थानीय मंदिर के पास रहनेवाले नाइक परिवार के २३ वर्षीय बेटे मुरली नाईक के शहादत की खबर जब मुरली के पिता श्रीराम को फोन पर मिली तो वह बेहोश गए। वह इन दिनों अपने पैतृक निवास आंध्र प्रदेश में थे।
मुरली पड़ोसी आतंकी देश पाकिस्तान से चल रहे युद्ध के बीच कल सुबह ३ बजे जम्मू कश्मीर के लाइन ऑफ कंट्रोल से मुरली लड़ते हुए शहीद हुए।वह २३ वर्ष के अग्नि वीर योजना के तहत भारतीय आर्मी में शामिल होने वाले प्रथम बैच के जवानों में से थे।
मुरली ने चार वर्ष की उम्र तक मुंबई में रहने के बाद आंध्र प्रदेश स्थित नाना के पास पढ़ने के लिए अपना समय बिताया। कॉलेज में पढ़ने के दौरान देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर भारतीय सेना को ज्वाइन करना चाहते थे।
भारत सरकार की अग्निवीर योजना आई और उसमें चयनित हुए।गुंटूर में कुछ समय तक प्रशिक्षण लिया । अग्निवीर में चयन के बाद नाशिक के देवलाली में ९ महीने की ट्रेनिंग ली और पोस्टिंग के रूप में असम, जम्मू, पंजाब और फिर जम्मू में सेवा दी।
मुरली अभी मकरसंक्रांति के समय १५ दिनों की छुट्टी लेकर माता पिता के पास समय देकर गए थे।
बीते गुरुवार सुबह आठ बजे मुरली ने ड्यूटी से लौटने के बाद मां ज्योति और पिता श्रीराम से वीडियो कॉल पर बात भी की थी। मुरली के पिता के अनुसार गुरुवार की बात ही मुरली के साथ की आखिरी बात थी।
मुरली एकमात्र नाइक दंपति की संतान थे। श्रीराम, मुरली के पिता ने कहा कि उन्हें गर्व है , उनका बेटा देश की रक्षा करते समय शहीद हो गया लेकिन हमने इसके लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। मुरली हमारा एकमात्र बच्चा था।
मुरली के पिता दिहाड़ी का काम करते है और मां ज्योति आस पास के परिसर में घर काम करती हैं। घर का SRA के तहत पुनर्विकास के लिए काम शुरू है इसलिए एक स्थानीय मंदिर के पास दूसरा घर किराए पर लिया है।
घाटकोपर कामराज नगर में विशेषकर बंजारा समाज के लोगों ने कल दोपहर को परिसर में बैनर लगाया और प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी मिली कि शहीद मुरली श्रीराम नाईक का बेटा है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के सीएम समेत कई दिग्गजों ने दुख जताया है।
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