0 न्यू इंडिया को ऑपरेटिव बैंक के बुक्स ऑफ अकाउंट की होगी फोरेंसिक जांच/ पूर्व महाप्रबंधक जांच के घेरे में / आर्थिक अपराध शाखा ने शुरू की पूछताछ/ ६ महीने तक रिजर्व बैंक ने बैंक के कामकाज पर लगाई रोक - Khabre Mumbai

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न्यू इंडिया को ऑपरेटिव बैंक के बुक्स ऑफ अकाउंट की होगी फोरेंसिक जांच/ पूर्व महाप्रबंधक जांच के घेरे में / आर्थिक अपराध शाखा ने शुरू की पूछताछ/ ६ महीने तक रिजर्व बैंक ने बैंक के कामकाज पर लगाई रोक

मामला पिछले पांच साल से हो रहे धोखाधड़ी का है जिसमें प्रभादेवी और  गोरेगांव दोनो बड़े ब्रांच का जिम्मा संभाल रहे तत्कालीन न्यू इंडिया को ऑपरेटिव बैंक के महा प्रबंधक  हितेश प्रवीण चंद मेहता ने १२२ करोड़ की हेरा फेरी कर डाली।

२०२० से लेकर २०२५ तक यह फ्रेड चलता रहा जब बुक्स ऑफ अकाउंट जिसमें बैंक में हो रहे लेन देन का हिसाब होता है, इसे टेली किया गया तो १२२ करोड़ का अंतर समझ में आया।

बहरहाल दादर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के ३१६(५); ६१(२) के तहत मेहता पर धोखाधड़ी का आरोप दर्ज किया और सीधे यह मामला आर्थिक अपराध शाखा यानी इओडब्ल्यू को सौंपा गया। हितेश मेहता को आर्थिक अपराध शाखा के मुख्यालय मुंबई में लाया गया है। यह मामला न्यू इंडिया बैंक के चीफ अकाउंट ऑफिसर द्वारा दर्ज कराया गया है।

लगभग १ लाख ३० हजार डिपोजिट करता है जिनका पैसा फंस गया है और न्यू इंडिया बैंक के ब्रांचों के सामने भारी भीड़ देखने को मिली है। 

क्रेडिट गारंटी फिर माइक्रो एंड स्माल फंड ट्रस्ट के तहत सरकार पांच लाख तक डिपोजिट को सुरक्षा प्रदान करती है। ऐसे में जिन पूजी धारकों को रकम ५ लाख तक अधिकतम है उन्हें अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं , सरकार उन्हें पैसे वापस दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रिजर्व बैंक ने फिलहाल बैंक के कामकाज पर अगले छह महीने तक के लिए रोक लगा दी है। न तो न्यू इंडिया को आप बैंक किसी को लोन दे सकती है और न ही किसी ग्राहक से कोई डिपोजिट ले सकती है।  हां, सरकारी नियमों के तहत बैंक , कर्मचारियों की सैलरी, इलेक्ट्रिसिटी बिल, कियरे का भुगतान कर सकेगा। 
रिजर्व बैंक ने न्यू इंडिया बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को अगले १२ महीनों के लिए बर्खास्त कर दिया है और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मुख्य महा प्रबंधक श्रीकांत को न्यू इंडिया को ऑपरेटिव बैंक के प्रशासनिक देख रेख के लिए नियुक्त किया है।

नए नियुक्त किए गए प्रशासक श्रीकांत( पूर्व SBI CGM)  की मदद के लिए रिजर्व बैंक ने कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स की नियुक्ति भी कर दी है।
चार्टर्ड अकाउंटेट अभिजीत देशमुख, पूर्व SBI महाप्रबंधक रवींद्र सप्रा को इस कमिटी में नियुक्त किया गया है।
न्यू इंडिया बैंक के डायरेक्टर बोर्ड को कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों की गंभीर अनदेखी करने के कारण रिजर्व बैंक ने अगले बारह महीने तक के लिए बर्खास्त कर दिया है। 

आपको बता दें कि इंटरनल फ्रोड के चलते एक हाउसिंग फाइनेंस एवं बिल्डर कंपनी को अधिक कर्ज देने में बैंक के डायरेक्टर के निजी इंटरेस्ट के चलते पंजाब एंड महाराष्ट्र को आप बैंक पर भी रिजर्व बैंक का डंडा चला था।

न्यू इंडिया को ओप बैंक की शुरुआत पूर्व में कांग्रेस सरकार में  रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडिस द्वारा की गई थी। उस समय  १९६८ में बॉम्बे लेबर को ऑपरेटिव बैंक के रूप में यह स्थापित हुई थी और कई कामगारों, मजदूरों का खाता इसी में हुआ करता था। १९८० के दशक में  तत्कालीन भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा इमरजेंसी लगाए जाने के बाद इसका नाम बदलकर वर्तमान नाम से यह बैंक अस्तित्व में आया।

देश भर में कुल १४७२ अर्बन को ऑपरेटिव बैंक हैं जिनमें ५,५५, ४६९ करोड़ रुपए जमा हैं। कुल मिलकर लगभग ३ लाख ४६ हजार ९०३ करोड़ रुपए का कर्ज इन बैंकों द्वारा लोगो को दिया गया है।

न्यू इंडिया बैंक के १ लाख ३० हजार जमा कर्ताओं में से लगभग ९० प्रतिशत जमा कर्ताओं के रुपए ५ लाख से कम हैं इसलिए उनके पैसे क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट के तहत इंश्योरेंस की छाया में हैं , वह नहीं डूबेंगे। 
न्यू इंडिया के पास कुल २४३६ करोड़ का डिपोजिट है। लगभग २७.९५करोड़  सेविंग अकाउंट के तहत हैं।
बैंक ने वित्तीय वर्ष २०२४ में २२.७४ करोड़ का नुकसान दर्ज किया था।



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