वीर बाल दिवस पर विशेष
वीर बाल दिवस
सिख समुदाय के दसवें धर्मगुरु गुरु गोविंद सिंह जहां एक ओर मुगलों से लोहा ले रहे थे, १७वीं की सदी का वह दौर था जब औरंगजेब के शासन में उसके नवाब वजीर खान ने इस्लाम कबूल करवाने के लिए गुरु गोविंद सिंह के दोनों बेटों साहबजादे जोरावर सिंह ९ वर्ष, साहिब जादे फतेह सिंह ७ वर्ष को काफी यातनाएं दीं लेकिन दोनों महान सपूत नहीं झुके ।
थक हार कर नवाब वजीर खान ने दोनों बेटों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया था।
गुरु गोविंद सिंह के चारों साहबजादे धर्म की रक्षा के लिए मर मिटे थे। यह घटना आज ही के दिन घटी थी।
अंतिम संस्कार के लिए जब दीवान टोडरमल ने शव मांगा तो नवाब वजीर खान ने शर्त रखी कि उतनी जमीन देने के लिए कहा जितने में सोने की अशर्फियां खड़ी करके रखीं जा सकें।
टोडरमल ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया लेकिन सोने की अशर्फियां की एक मीनार बनवा दी और साहबजादों का अंतिम संस्कार किया।
सिख समाज के ये दोनों हीरे जिनके खेलने कूदने की उम्र थी उनकी ऐसी शहादत से गला भर आता है। मुगलों के क्रूरता की यह इंतिहा थी।
पूरे देश का सर गर्व से ऊंचा उठ जाता है ऐसे सपूतों पर जिन्होंने अंतिम सांस तक भी अपनी संस्कृति, अपना धर्म नहीं छोड़ा, अपने देश का सौदा नहीं किया।
जिस जगह उन्हें चुनवा दिया गया था वहां आज गुरुद्वारा फतेहपुर साहिब है।
वीर अमर बाल शहीदों को शत शत नमन।
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