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जौनपुर सदर से श्रीकला सिंह का टिकट खुद धनंजय ने ही कटवाया? जनता के साथ हमेशा खड़े रहने का श्रीकला ने दिया भरोसा!

जौनपुर सदर के सीट उत्तर प्रदेश में प्रमुख लोकसभा सीट मानीजाती है। 
जौनपुर सीट के बारे मे कहां जाए तो इस बार काफी चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि भाजपा ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहराज्य मंत्री  एवम पूर्व के दिग्गज कांग्रेसी नेता  रहे कृपाशंकर सिंह को यहां से लोकसभा प्रत्याशी बनाया है। 
वहीं कुछ ही दिनों पहले बहुजन समाज पार्टी ने जौनपुरजिला पंचायत अध्यक्ष एवं पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह की  पत्नी श्रीकला रेड्डी सिंह को सांसदी का टिकट दिया और उनका प्रचार भी जोरों से होने लगा था।

धनंजय सिंह की स्वयं सांसदी लड़ने की इच्छा थी पर चुनाव के ऐन वक्त पर उन्हे सरकारी अधिकारी से किडनैपिंग एवम रंगदारी वसूलने के आरोप में न्यायपालिका ने ७साल के लिए जेल भेज दिया।
६ मार्च को जेल भेजे जाने के बाद उनके सांसदी लड़ने को इच्छा पर पानी फिर गया।

अचानक से पत्नी श्री कला सिंह को बसपा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद जहां धनंजय समर्थको में खुशी की लहर दौड़ गई, प्रचार में भी सैकड़ों हजारों की भीड़ जमा होने लगी।
श्रीकला सिंह को जन समर्थन भी मिलने लगा था कि इसी बीच धनंजय को एंबुलेंस में डालकर पुलिस प्रशाशन बरेली मध्यवर्ती कारागृह में शिफ्ट करती है।
इससे पहले पत्नी ने मीडिया के सामने एवम जनता के बीच अपना आंचल फैलाकर अपने पति  धनंजय की जान को खतरा बताते हुए गिड़गिड़ाते दिखीं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी के नाम की गुहार लगाकर अपने सुहाग की रक्षा की प्रार्थना भी की और कहा मेरे मंगलसूत्र की रक्षा कीजिए।

जिस सुबह धनंजय सिंह को बरेली जेल भेजा गया उसी दिन उन्हे जमानत पर दोपहर में रिहा कर दिया गया।
धनंजय सिंह ने मीडिया वार्ता में कहा कि अब उन्हें पत्नी के प्रचार के लिए जौनपुर में जुट जाना है। बता दें कि जौनपुर ,धनंजय का क्षेत्रीय निवास भी है और यहां से जनता के बीच बहुत लोकप्रिय भी। श्रीकला सिंह भी यहीं से जिला पंचायत अध्यक्ष भी हैं।

रविवार रात तक प्रचार की रणनीति चलती रही।समर्थको, मीडिया, पार्टी कार्यकर्ताओं किसी को रत्ती भर खबर नही हुई कि सुबह नामांकन के दिन श्रीकला सिंह ने चुनाव लडने से इंकार कर दिया।

( मध्य में : धनंजय सिंह की पत्नी और जनपद जौनपुर पंचायत अध्यक्ष श्रीकला रेड्डी सिंह)

खबर यह है कि धनंजय सिंह ने ही बसपा के आला राजनेताओं को जानकारी दी और कहा कि पत्नी का नाम सीट से  निकाल दिया जाए।

इसके पीछे क्या गणितीय सूत्र है ,इस पर कई अटकलें हैं।

कई स्थानीय की माने तो शायद भाजपा ने जेल वाले मामले में क्लीन चिट दिलाने का आश्वासन दिया हो और चुनाव में समर्थन की शर्त रखी हो।
कुछ की अटकलें हैं कि भाजपा के मोदी लहर के सामने जीतना चुनौती पूर्ण है  और हारने के बाद पंचायत अध्यक्ष के लिए भी अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है और इस वजह से मौजूदा अध्यक्ष पद बचाना भी मुश्किल हो सकता है।

(बाएं से : अभय सिंह, धनंजय सिंह)

धनंजय के कभी हमसफर और गहरे मित्र रहे और वर्तमान में दुश्मन बने अभय सिंह विधायक भी सपा छोड़ भाजपा के खेमे में हैं और कृपा भैया को सपोर्ट भी कर रहे हैं।

इन सबके बीच आज सोशल एप X पर स्वयं श्रीकला धनंजय सिंह ने पोस्ट किया कि जौनपुर के विकास के लिए वह कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं।कुछ भी न्यौछावर कर सकती हैं जनता के हित के लिए।
सरकारें, पार्टियां आती जाती रहेंगी लेकिन सरकार हमसे ( जनता) से है। , हम सरकार से नही हैं। चाहे कुछ हो जाए, जौनपुर की जनता के साथ हमेशा सुख दुख में खड़ी रहेंगी। 

चाहते तो बाहुबली पूर्व सांसद अपनी पत्नी को निर्दलीय लड़ा देते क्यों कि उनका व्यक्तिगत रूप से सूबे में बड़ा वोट बैंक है जो भाजपा, सपा दोनो के उम्मीदवारों के समीकरण को बिगाड़ सकता था, लेकिन धनंजय सिंह ने ऐसा भी नहीं किया।

उनके इस पोस्ट के पीछे कदाचित चुनाव लडने के कदम को पीछे लेने वाली पीड़ा भी झलक रही है।
पर इतना तो तय है कि जहां धनंजय सिंह की पत्नी के चुनावी जंग में होने से भाजपा के कृपा शंकर सिंह को जीतने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ सकती थी, अब यह राह आसान हो गई है।

कयास यह भी लगाया जा रहा है कि खुद बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया है। उनके भतीजे आकाश ने हाल ही में भाजपा के खिलाफ कुछ कड़वे बोल बोल दिए थे तो उनकी कई रैलियां कैंसल हो गई थीं। यदि धनंजय की पत्नी चुनाव लड़ती तो राजपूतों के वोट का बंटवारा होना बिल्कुल तय था और भाजपा के लिए यह कड़ी टक्कर होती। 
फिलहाल सीट की टिकट बसपा ने निवर्तमान सांसद श्याम सिंह यादव को से दिया और खुद मायावती जी ने फोन कर श्याम सिंह यादव को इसकी पुष्टि की।

उधर सपा के PDA फार्मूले के तहत भ्रष्टाचार के आरोपी रहे बाबू सिंह कुशवाहा को टिकट दिया गया है जहां मुसलमान, यादव तो वोट देंगे ही साथ ही साथ कुशवाहा वर्ग भी वोट देगा, चूंकि बाबू सिंह की उनके समाज में अच्छी पैठ है।

क्या भाजपा के साथ जा सकते हैं धनंजय?

कयास यह लगाए जा रहे हैं कि धनंजय की पत्नी भाजपा खेमे में जा सकती हैं। जहां पार्टी में उन्हें बड़ा पद दिया जा सकता है। फिलहाल आने वाले दिनों में इसकी भी पुष्टि हो ही जाएगी।



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