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रिजर्व बैंक ने फिर नही की कोई कटौती/ ग्राहक रहेंगे परेशान/ बढ़ा फिर बैंको का ब्याज दर

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसीकमेटी द्वारा कल ब्याज दरों मेंहोने वाले बदलाव को लेकरनिर्णय दिया गया है।

इस निर्णय के तहत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया  है यह पूर्ववत 6.50% ही रहेगा। जबकि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी रेट 6.75% पर रहेगा। 

आपको बता दें कि ६ में से पांच सदस्यों ने इस फैसले पर सहमति जताई है। देश के विकास दर पर भरोसा जताते हुए ७% रखा गया है।

आम आदमी को कोई राहत नहीं।कब हो सकती है ब्याज दरों में कटौती?

आम आदमी को कर्ज में कोई सहूलियत इतनी जल्दी नहीं मिलने वाली है।  सूत्रों की माने तो भले ही रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को पूर्ववत ही रखा है पर कुछ बैंको और एनबीएफसी ने अपने ब्याज दरों में आज से बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है।


पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी ने अपने वर्तमान ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में ०.२०% वृद्धि का ऐलान कर दिया है।  ये वित्तीय संस्थान बड़ी ही समझदारी से लोन की अवधि को बढ़ा देते हैं जबकि दी जाने वाली ईएमआई में कोई वृद्धि नही करते। ऐसे में कई ग्राहक उनके इस चक्रव्यूह को समझ नही पाते और जीवन पर्यंत लोन भरते ही रह जाते हैं।
मान लीजिए आपका होम लोन यदि 20 वर्ष का हो और ब्याज दर 0.20% से बढ़ जाए तो इसी लोन की अवधि डेढ़ से दो साल तक बढ़ जाती है जबकि मासिक ईएमआई रकम पर कोई प्रभाव नहीं बढ़ेगा।

वित्तीय विश्लेषकों एवम रेटिंग एजेंसियों की माने तो भारत में ब्याज दर अमेरिका में दर कटौती के बाद ही आएगा। भारत में ब्याज दरों में कटौती सितंबर यानी इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के बाद ही संभव नजर आता है।
 महंगाई दर 4.5% रहने के अनुमान हैं और गवर्नर शक्तिकांत दास ने चेताया है कि खाद्य मंहगाई दर ही आंकड़ा बिगाड़ सकती है। रिजर्व बैंक ने लक्ष्य रखा है कि मंहगाई दर 4% से 6% के औसत में ही बनी रहे। 

बैंको ने वैयक्तिक कर्ज का अनुपात भी अपनी कुल कर्ज की श्रेणी से कम करना शुरू कर दिया है।

यदि आप गृह कर्ज लेने की सोच रहे हैं और सस्ता ब्याज दर चाहते हैं तो अभी इंतजार करना बेहतर  विकल्प होगा  या निर्धारित ईएमआई से अधिक पैसे देकर अपने कर्ज को जल्द से कम करना सूझ बूझ का कदम माना जाएगा।

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