करोड़ों की मालकिन ,बाहुबली की पत्नी, नामी उद्योगपति की बेटी है जौनपुर से लोकसभा प्रत्याशी/ त्रिकोणीय मुकाबले में जनता किसे पहनाए सांसद का ताज?
श्री कला रेड्डी धनंजय सिंह यह नाम भले ही जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में लोग जानते हैं, पर उनकी पहचान इससे कही बहुत ज्यादा है।


चुनावी हलफनामे अनुसार लगभग ६.७१ करोड़ की चल संपत्ति और वहीं ७८० करोड़ की अचल संपत्ति की मालकिन श्री कला रेड्डी ,के जितेंद्र रेड्डी की बेटी हैं जो निप्पो बैटरी के मालिक हैं और ७० के दशक में दक्षिण भारत से स्वयं विधायक रहे हैं, मां ललिता रेड्डी भी सरपंच रह चुकी हैं।
धनंजय सिंह ने विदेश में रचाई थी श्रीकला संग शादी
२००९ में जौनपुर से बसपा सांसद रहे धनंजय सिंह ने २०१७ में यानी लगभग ७ साल पहले श्री कला से पेरिस में शादी की थी , जिसके बाद चेन्नई में भी विवाह किया जिसमे अल्लू अर्जुन जैसे बड़े बड़े फिल्मी स्टार से लेकर बड़े बड़े उद्योग पतियों ने हाजिरी लगाई थी।
एक रिपोर्ट के अनुसार श्रीकला, धनंजय सिंह की तीसरी पत्नी हैं और बाहुबली सिंह से विवाह के पहले वह भी तलाकशुदा थीं।
धनंजय की दूसरी पत्नी रही डॉक्टर जागृति सिंह अपनी नौकरानी की हत्या के मामले में जेल पहुंच गई। उनकी पहली पत्नी से विवाह के लगभग ९ माह बाद ही संदिग्ध परिस्थितियों में पत्नी के आत्महत्या की खबरे भी रही।
वैसे तो धनंजय खुद चुनाव लडना चाहते थे लेकिन सरकारी अधिकारी को पहले किडनैपिंग और फिर रंगदारी( हफ्तावसूली) के आरोप में अदालत द्वारा ७ साल के लिए जेल भेज दिया गया और धनंजय के चुनाव लडने के मंसूबे पर पानी फिर गया।
इसी बीच भाजपा ने कभी महाराष्ट्र के कांग्रेस शासन में गृहराज्य मंत्री रहे और कलीना, संता क्रूज के कई बार के विधायक कृपाशंकर सिंह को उनके पैतृक जनपद जौनपुर से लोकसभा का टिकट दे दिया। उत्तर भारतीय नेता कृपा भैया २०२१ मध्य में भाजपा का दामन थामा था और महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष के रूप में उन्हें जिम्मेदारी भी मिली थी। कृपा भैया पर लगभग ११०० करोड़ के मनी लांड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच भी चली थी और इस सिलसिले में उन्हें कई बार ईडी दफ्तर बलार्ड एस्टेट के चक्कर भी लगाने पड़े थे।
इधर धनंजय के जेल जाने के बाद बसपा अचानक लड़ाई में कूद गई और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर उनकी पत्नी श्रीकला को जौनपुर से ही टिकट दे दिया गया है।
जनपद में तीसरी बड़ी पार्टी समाजवादी पार्टी से बाबूसिंह कुशवाहा मैदान में है और इस तरह यह लड़ाई त्रिकोणीय है।
राजनीतिज्ञों की माने तो कृपा भैया यूपी से निकलकर महाराष्ट्र में सफल राजनीतिक व्यक्तित्व में से एक प्रख्यात चेहरा हैं और यदि वह चुनकर आते हैं तो जौनपुर पूरे देश की राजनीति के लिए केंद्र बिंदु की तरह उभरेगा।
कृपाशंकर कांग्रेस में रहने के दौरान वरिष्ठ नेताओं की जी हजूरी, न चाहते हुए भी बयान देना जैसे मुद्दों पर अपनी सफाई दी और ट्विटर( अब x) पर संदेश भी कि राष्ट्र के विरोध में उनके सुर कभी नही हो सकते और भाजपा में आकर उन्हें दूसरा जन्म मिला है।
जनपद के कई हिस्सों में प्रचार अपने चरम पर है।
धनंजय और श्रीकला गहनों के शौकीन हैं ।जहां धनंजय के पास लगभग ६६ लाख वही मैडम के पास लगभग पौने २ करोड़ के गहने हैं।
धनंजय सिंह के नाम राइस मिल , पेट्रोल पम्प भी हैं और वह किसान भी हैं। पहले विधायक और सांसद रहे इसलिए उसका भत्ता भी मिलता है। जौनपुर और लखनऊ में कमर्शियल लैंड भी धनंजय के नाम पर हैं।
२७ साल की उम्र में विधायक बने धनंजय ने वीर बहादुर पूर्वांचल यूनिवर्सिटी जौनपुर से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स की उपाधि ली है। २००२ में निर्दलीय, २००७ में जदयू से विधायक, २००९ में बसपा से सांसद रह चुके धनंजय पर कई मामले दर्ज है और बाहुबली का तमगा उनके नाम के साथ जुड़ा हुआ है।
बाबू सिंह की क्या है कहानी?
जन अधिकार पार्टी २०१६ में बनी और उसके जनक हैं बाबू सिंह कुशवाहा।
कभी २०१२ में भाजपा से विधायक रहे लेकिन विवादों के चलते पार्टी से निकाला गया, इस समय के चुनाव में भाजपा पूरे प्रदेश में ५० सीटों फल सिमट गई थी।
इससे पहले बाबू सिंह कभी बसपा प्रमुख बहन मायावती के आंख कान हुआ करते थे। इतना विश्वास कि बाबू कुशवाहा जो कह देते मायावती तुरंत मान लेती।
२०१३ में कुशवाहा की पत्नी और भाई दोनो ने सपा का साथ पकड़ा और दिवंगत मुलायम सिंह यादव ने पत्नी शिवकन्या को गाजीपुर से लड़ाया लेकिन भाजपा के मनोज सिन्हा के सामने पराभव का मुंह देखना पड़ा था।
भले ही जन अधिकार पार्टी का विलय सपा में न हुआ हो लेकिन सपा की लिस्ट में कुशवाहा को जौनपुर से टिकट दिया गया।दस बारह साल से कुशवाहा का फायदा पार्टियों को भले न हुआ हो पर वह भ्रष्टाचार के मामले में सुर्खियों में रहे हैं।
पल्लवी पटेल, ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य सपा छोड़ चुके हैं।ऐसे में जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर अखिलेश ने सारे भ्रष्टाचार को किनारे रख कुशवाहा को जौनपुर से उतारा है।
मुंबई से जौनपुर की राजनीति में एंट्री करनेवाले कृपाशंकर लगभग विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ गांव गांव नजर आ रहे हैं।
देखना यह होगा कि जनता विकास पुरुष मोदी के नाम पर कृपा के नाम मुहर लगाकर जौनपुर की राजनीति में नया अध्याय लिखेगी या बाहुबली धनंजय की वापसी होगी या फिर सपा चीफ अखिलेश सिंह यादव का इक्का यानी कुशवाहा इतना रायता फैलने के बावजूद जातीय चेहरे के दम पर फिर जनता का मन जीत सकेंगे।
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