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नवी मुंबई साइबर पोलिस अधिकारी बनकर ऑनलाइन फ्रॉड; के ई एम की डॉक्टर को लगा ७ लाख का चूना

ऑनलाइन फ्राड के बहुत सारे मामले हम अक्सर सुनते रहते हैं जिसमें कम पढ़े-लिखे लोग या आईटी से संबंधित कम जानकारी रखने वाले अक्सर फंसते रहते हैं पर ऐसा अब बड़े बड़े पढ़े लिखे के साथ भी हो रहा है।

ताजा जानकारी के अनुसार नवी मुंबई पोलिस आयुक्त मिलिंद भांबरे के नामका इस्तेमाल कर ऑनलाइन फ्राड को अंजाम दिया गया और पीड़िता देश के जाने माने अस्पताल के ई एम अस्पताल की सीनियर डॉक्टर से जुड़ा है।
२७ वर्षीय डॉक्टर को फेडेक्स कुरियर नाम से  २९ फरवरी को फ्रॉड काल आया कि उसके नाम से पार्सल है जिसे मुंबई एयरपोर्ट अधिकारियों ने पकड़ा है।इस पार्सल में ५ पासपोर्ट, ३ क्रेडिट कार्ड, १४० ग्राम एमडीएमए पिल्स, ४ किलो कपड़े और एक लैपटॉप है।
फेडेक्स के तथाकथित कालर ने डॉक्टर से कहा कि वह कस्टमर केयर अधिकारी से बात कर ले।

इसके बाद कस्टमर केयर ने कॉल साइबर पोलिस को ट्रांसफर किया। साइबर अधिकारी ने पार्सल के बारे में डॉक्टर से पूछते हुए बताया कि वह इसे ताइवान में किसे भेजना चाहती है?

डॉक्टर, २७ वर्षीय ब्लेसी एस्थर राजा सुरेश रत्ना कुमार पल्ले ने इस जानकारी से साफ इंकार कर दिया।
डॉक्टर एस्थर ने कहा कि इस पार्सल की उसे कोई जानकारी नहीं है।साइबर पुलिस ने उसे एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा तो डॉक्टर ने कहा आज वह अस्पताल में व्यस्त है, कल आकार शिकायत देगी।
पोलिस ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए कहा और स्काइप आप डाउनलोड करवाया।

१५ सेकंड की वीडियो कॉल में बैकग्राउंड साइबर पुलिस की तरह रहा अधिकारी का फोटो ब्लर आ रहा था पीछे से सिर्फ एक व्यक्ति की आवाज सुनाई दे रही थी, स्काइप अकाउंट में बड़े अक्षरों में मुंबई क्राइम ब्रांच लिखा हुआ था।

अधिकारी ने डॉक्टर को बताया कि उसके नाम पर कुछ फर्जी बैंक खाते खोलकर आतंकी फंडिंग का काम कुछ लोग कर कर रहे हैं। एक आतंकी ने कोर्ट में डॉक्टर का नाम बोला है और इसलिए यह डॉक्टर मुंबई पोलिस के लिए मोस्ट वांटेड एक्यूज्ड की लिस्ट में आ गई है। डॉक्टर को तुरंत अस्पताल से निकलने और बैंक ब्रांच के निकट किसी होटल में रहने की नसीहत अधिकारी ने दे दी।
अधिकारी ने कहा डिजिटल अरेस्ट का वारंट जारी हुआ है और वह कभी भी गिरफ्तार हो सकती है।

( ध्यान दें कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया पोलिस विभाग में नही है)।
अपनी बात को साबित करने के लिए अधिकारी ने मिलिंद भरमबे उपायुक्त साइबर क्राइम द्वारा हस्ताक्षरित फेक लेटर भी मोबाइल पर भेजा।

डरी हुई डॉक्टर एस्थर दादर ईस्ट स्थित प्रीतम मिड टाउन होटल में रूम बुक कर रहने चली गई। अगले दिन १ मार्च को घर वापस आ गई।

फर्जी पोलिस अधिकारी ने फिर फोन कर बताया कि रिजर्व बैंक से उसे एक लेटर आएगा ।

एक अज्ञात मोबाइल नंबर से डॉक्टर को व्हाट्सएप पर आरबीआई का लेटर मिला जिसमे उसके खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस क्रमांक ६८४३१५ होने की बात कही गई।

डॉक्टर को ६,८४,३१५ रुपए आरबीआई को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था।जिसके बाद डॉक्टर के सभी अकाउंट वेरिफाई किए जाएंगे और आधे घंटे बाद उसे उसके पैसे वापस दिए जायेंगे। डॉक्टर ने बताए हुए खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए।।

पैसे नही वापस आने पर डॉक्टर ने पोलिस अधिकारी को पूछा तो जवाब मिला कि उसके खाते की स्क्रुटनी जांच चल रही है, पैसे  आ जाएंगे।

पोलिस ने पूछ लिया कि उसके पास अब कितने पैसे हैं? फ्रॉड से अनजान डॉक्टर ने ७६ हजार रुपए पास होने की बात कही तो पोलिस अधिकारी ने कहा कि वह उसे क्लीन चिट देना चाहता है पर इसके लिए उसे( डॉक्टर ) को ९ अलग अलग एफिडेविट पर साइन करने पड़ेंगे। प्रति एफिडेविट ५००० रुपए खर्च के हिसाब से और एप्लीकेशन फि लेकर ४८ हजार ट्रांसफर करने होंगे।

बात करते हुए डॉक्टर शिवड़ी स्थित घर आई और साथी रूम मैट को जानकारी दी ।रूम पार्टनर ने उसके साथ चीटिंग होने का शक जताया।

भोईवाड़ा पोलिस ठाणे ने अभियुक्त के खिलाफ ४१९, ४२०, ४६५, ४६७, एवम धाराओं ६६सी, ६६डी के तहत मामला दर्ज किया है। आईटी एक्ट की धारा २००० भी लगाई गई है।





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