नागपुर जिल्हा बैंक में १२५ करोड़ के फंड घोटाले में पूर्व कांग्रेस मंत्री सुनील केदार को पांच साल आश्रम कारावास
मामला नागपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक एनडीसीसीबी से जुड़ा है जिसके चेयरमैन के पद पर विधायक एवम पूर्व कांग्रेस मंत्री सुनील केदार थे। जिला न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा दोषी मानते हुए केदार समेत पांच अन्य पर १० लाख प्रत्येक पर जुर्माने सहित पांच साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। बैंक १९११ से कार्यरत है।
(फाइल फोटो: सोनिया गांधी ,कांग्रेस पूर्व अध्यक्षा के साथ विधायक एवम राज्य के मंत्री रहे सुनील केदार)
सुनील केदार के अतिरिक्त बैंक के महाप्रबंधक एवम निदेशक तथा एक निवेश कंपनी होम ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भी इस मामले में दोषी हैं और सजा दी गई है।
२००२ में नागपुर डिस्ट्रिक्ट को ऑपरेटिव बैंक द्वारा गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में जमा किए गए १२५ करोड़ की राशि डूब गई। निवेश करते समय बैंक के नियमो को तोड़ते हुए होम ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से जी सेक पेपर्स में निवेश किया गया था।अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश ज्योति पेखले पुरकर के अनुसार, यह १२५ करोड़ जो नागपुर बैंक के थे उसमे अधिकांशतः गरीबों की ही जमा पूंजी थी।
इस मामले में ३ अन्य दोषियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। २१ साल से यह मामला अदालत में चल रहा था। सुनील केदार समेत ११ दोषियों पर आईपीसी की धाराओं ४०६, ४०९, ४६८,४७१, १२० बी, ३४ के तहत आरोप लगाए गए थे।
नागपुर बैंक के इस फ्रॉड मामले में पूर्व महाप्रबंधक अशोक चौधरी, तत्कालीन मुख्य अकाउंटेंट सुरेश पेशकर, महेंद्र अग्रवाल, श्रीप्रकाश पोद्दार, सुबोध भंडारी, कानन मेवावाला, नंद किशोर त्रिवेदी, अमित वर्मा , केतन सेठ ( मुंबई से स्टॉक ब्रोकर) शामिल हैं। मेवा वाला अब भी फरार है। अग्रवाल के मामले में मुंबई उच्च न्यायालय ने पहले ही रोक लगा दी थी।
इस पूरे प्रकरण की जांच सीआईडी उपाधीक्षक किशोर बेले रहे। जिन्होंने नवंबर २००२ में ही अदालत में चार्जशीट दायर की थी जबकि फैसला लगभग २१ साल बाद आया है।
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