पत्नी और बेटे समेत आजम खान फिर पहुंचे सात साल के लिए जेल/बेटे का राजनीतिक करियर संवारते संवारते सब कुछ खत्म हो गया
आजम खान , उनके सुपुत्र ,पत्नी तंजीन फातिमा को सात साल की सजा सुनाकर जेल भेज दिया गया है और यही उनका वर्तमान सच है।
एक सच यह भी है कि समाजवादी पार्टी की सरकार के रहते समय आजम खान का राजनीतिक कैरियर बुलंदियों तक पहुंचा। उस वक्त एक दौर था जब उनके निर्वाचन क्षेत्र रामपुर में ही उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग हो जाया करती थी और रामपुर के इस विधायक आजम खान के इशारे पर सपा सरकार काम करती थी। पर यह सब अब तो इतिहास है और वर्तमान में वह जेल में बंद है.. यही सच । इन तीनों पर धाराओं 120B, 420,467,468, 471के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
7 साल की सजा आजम खान ,पत्नी, और बेटे को उनके बेटे अब्दुल्ला खान के फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट से जुड़े होने पर मिली है।
2019 के विधानसभा चुनाव में बेटे को विधायक की लड़वाने के लिए जो फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पेश किया गया उसके अनुसार बीते अब्दुल्ला का जन्म 1990 में हुआ था जबकि वास्तविकता यह है कि अब्दुल्ला खान का जन्म 1993 में हुआ था। बेटे की उम्र ज्यादा बताने के चक्कर में पिता और माता यानी आजम खान और फातिमा खान को जेल की हवा खानी पड़ रही है।
वैसे सपा सरकार के जाने के बाद से ही आजम खान पर जिनके काले बादल मंडल आने लगे थे और इससे पहले भी उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा चाहे मामला 15 वर्ष पुराना रोड ब्लॉक कर रहा हो या फिर मामला हेट स्पीच का हो।
एक दौर यह था की मीटिंग शुरू होने से पहले दिग्गज नेता आजम खान के घर में दरबार लगा लेते जबकि आजम देर से आते थे। पर अब वह चमक लगभग खत्म हो चली है जब इक्का दुक्का शायद ही कोई नेता घर के सामने ठिठक जाता हो। सपा के वरिष्ठ नेता एवम उत्तर प्रदेश कैबिनेट में मंत्री रहे आजम खान अपनी पत्नी की सेहत के लिए बहुत चिंता में रहते हैं। वह 10 बार विधायक रह चुके हैं।
इस मामले की शिकायत रामपुर के ही भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने की थी और आखिर कार्रवाई हो ही गई। सक्सेना की शिकायत थी की खान दंपति ने बेटे अब्दुल्ला की दो बर्थ सर्टिटिफेट बनाई थी। एक 2012 में रामपुर की नगरपालिका से जिसमे जन्मस्थान रामपुर बताया गया जबकि दूसरे में 2015 में मिले प्रमाण पत्र के तहत अब्दुल्ला का जन्म लखनऊ में बताया गया और प्रमाण पत्र भी लखनऊ नगरपालिका से फर्जी जारी किया गया है।
सपा के अध्यक्ष एवम सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा इस कार्रवाई से एक विशेष समाज के लोगों को डराना चाहती है।
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