0 गणपति के पांचवे दिन का विसर्जन आज/ मुंबई समेत महाराष्ट्र में आज होंगे पांच दिन के बप्पा विदा/ अनंत चतुर्दशी के विसर्जन को लेकर है प्रशाशन सतर्क - Khabre Mumbai

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गणपति के पांचवे दिन का विसर्जन आज/ मुंबई समेत महाराष्ट्र में आज होंगे पांच दिन के बप्पा विदा/ अनंत चतुर्दशी के विसर्जन को लेकर है प्रशाशन सतर्क

मंगलवार 19 सितंबर से ही भगवान गणेश की चतुर्थी के दिन से मुंबई के विभिन्न पंडाल में भगवान श्री गणेश का आगमन हो चुका है। लालबागचा राजा लालबाग, माटुंगा के जीएसबी सेवा मंडल, चिंचपोकली चा राजा यानी चिंचपोकली चा चिंतामणि, चेंबूर चा राजा समेत कई बड़े प्रसिद्ध पंडालों में आम से लेकर खास तक हर कोई बप्पा के दरबार में हाजिरी लगा रहा है।

      ( लालबागचा राजा)

आज पांच दिन के गणपति का विसर्जन होगा। कई छोटे बड़े पंडाल एवम घर गुती गणपति आज विदा होंगे।
(माटुंगा स्थित GSB सेवा मंडल के गणपति)

मुंबई के बहुत प्रसिद्ध गणपति पंडाल माटुंगा के जी एस बी सेवा मंडल के गणपति बप्पा भी आज विदा होंगे।
GSB सेवा मंडल के बप्पा मुंबई के सबसे अमीर पंडालों में आते हैं। मूर्ति की ऊंचाई लगभग १५ फीट है, ६६ किलो सोना, २९५ किलो चांदी से सजे आकर्षक एवम मनमोहक गणपति यहां विराजे हैं। पंडाल का ३६० करोड़ का बीमा GSB सेवा मंडल ट्रस्ट द्वारा कराया गया है। मुंबई का यह एकमात्र पंडाल है जहां 5 दिनों तक 24 घंटे लगातार हम और हवन किए जाते हैं इस बार खास आकर्षण यह है कि अयोध्या में राम मंदिर के लोकार्पण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके लिए यहां से 48 किलो सोना और 136 किलो चांदी अयोध्या के राम मंदिर की सेवा में भेजे जाएंगे। यह सब कुछ भक्तों के द्वारा दान किए गए है। पांचो दिन महा प्रसाद की व्यवस्था भी रखी गई है। भक्तो के लिए निःशुल्क दर्शन की व्यवस्था स्काईवॉक मार्ग द्वारा उपलब्ध है, जबकि जो बप्पा के निकट पंडाल के अंदर जाकर दर्शन करते हैं उनके लिए 505 रुपए के न्यूनतम पास ( एक पास पर चार से पांच लोगो को दर्शन की अनुमति है) के साथ यह सुविधा उपलब्ध है। भगवान गणेश के दर्शन के साथ ही प्रसाद वितरण भी किया जाता है।

पांचवे दिन के विसर्जन को गौरी गणपति विसर्जन भी कहा जाता है।

गणपति स्थापना से लेकर अनंत चतुर्दशी तक गणपति उत्सव की धूम रहती है। अनंत चतुर्दशी यानी ग्यारहवें दिन बप्पा विदा होंगे। 
मुंबई, महाराष्ट्र के कोंकण में गणपति उत्सव को लेकर विशेष उत्साह होता है।
डेढ़ दिन के बप्पा से लेकर दस दिन के बप्पा विराजमान होते हैं।
मुंबई मनपा के आंकड़ों के अनुसार इस बार डेढ़ दिन के विसर्जन में २७ हजार ५६४ घरगुती गणपति बप्पा विदा हुए । पिछले वर्ष की तुलना में यह आंकड़ा २३ प्रतिशत तक बढ़ा है। २०२२ में सार्वजनिक पंडालों से  १८२२ बप्पा , घर घर से ६१९८५ बप्पा का विसर्जन हुआ था।

मनपा ने सभी से इको फ्रेंडली मूर्ति स्थापना का आवाहन भी किया , प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों के उपयोग करने की सलाह दी थी। शहर में पिछले वर्ष १६२ कृत्रिम तालाब बनाए गए थे।

   (डोंबिवली में विराजे गणराया)

क्या है इतिहास 
गणेशित्सव पर्व, भारतीय इतिहास के अनुसार स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल बंगाधार तिलक ने शुरू किया था। इस समय भारत अंग्रेजो की गुलामी से पीड़ित था और अंग्रेजों ने लोगों के संगठित होने पर रोक लगाई थी ,ताकि उनके खिलाफ भारतीय एकजुट होकर कोई योजना बनाकर विद्रोह न कर सकें।
लोकमान्य तिलक ने इसका समाधान ढूंढते हुए गणेशोत्सव एवम दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी।
अंग्रेज यह जानते थे कि भारतीय लोग धर्म में बहुत विश्वास रखते हैं और धार्मिक पूजा अर्चना से रोकने पर क्रांति की भावना भड़क उठेगी ,इसलिए ब्रिटिश सरकार गणेशोत्सव आयोजन पर चुप रही। योजना सफल रही और लोगों को स्वतंत्रता के लिए वैचारिक रूप से जोड़ने में लोकमान्य तिलक सफल भी हुए थे।





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