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महिला आरक्षण बिल लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में पास। बन जाएगा अब कानून/ एक तिहाई सीट केंद्र एवं राज्य के विधान मंडल में महिलाओं के लिए आरक्षित

मोदी सरकार ने लोकसभा में दो दिन पहले विशेष क्षेत्र में बुलाई गई सदन में बहस के बीच महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दिलवा दी है।

(राज्यसभा में सभी २१४ सदस्यों ने बिल के समर्थन ने मतदान किया, बिल के उच्च सदन में पास होने के बाद, महिला सदस्य: पीएम मोदी को बधाई देते हुए)

सभी पार्टियों के सदस्यों ने महिला आरक्षण बिल पर समर्थन जताया है इक्का दुख के कुछ विरोधी सुरभि रहे फिर भी तीव्र ध्वनि मत से लोकसभा में यह बिल पास कर दिया गया पिछली सरकारों में भी चार बार यह कोशिश की जा चुकी है पर सफल नहीं हो सकी थी। १९९२, १९९६, १९९८, २००८ में इस पर कोशिश की गई थी,  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐसा सदन में कहा।

संसद भवन की नई इमारत में राज्यसभा में भी गुरुवार के दिन महिला आरक्षण बिल को पास करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली इस बिल पर कई क्षेत्र से सम्मानित महिलाओं को भी निमंत्रित किया गया था।
उल्लेख करने की 2010 में भी राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दी गई थी जिसका समय 2014 में समाप्त हो गया था इसलिए गुरुवार को फिर से राज्यसभा के टेस्ट से इस विधायक को गुजरना पड़ा।

(एआईसीसी मुख्यालय, नई दिल्ली के सामने महिलाएं प्रसन्नता जाहिर करते हुए )
 फिल्म जगत ,उद्योग ,बैंकिंग, राजनीति समेत कई क्षेत्रों से महिलाओं को निमंत्रित किया गया था 132 सांसदों ने महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में बोला था।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस महिला आरक्षण बिल में ओबीसी को जगह नहीं दी गई है एससी और एसटी समाज को पूर्ववत जगह मिली हुई है। मौजूदा एस टी, एस सी एंग्लो इंडियन समाज के लिए आरक्षित कोटे में से जगह दी जाएगी। 

इस बिल के पास हो जाने के बाद अब महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से बढ़ेगी लोकसभा चुनाव के साथ-साथ सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं को वरीयता मिलेगी।
पुरुषों के साथ समानता, लैंगिक विषमता एवम सामाजिक मतांतर भी दूर होंगे। इस विधेयक के जुड़ने के बाद अब महिलाओं के लिए ३३प्रतिशत सीट लोकसभा के साथ ही राज्यों के विधान मंडल के लिए भी रिजर्व होंगे।  यह आरक्षण जम्मू कश्मीर के चुनाव पर भी प्रभावी होगा। १५ वर्षों के लिए यह आरक्षण लागू रहेगा और तदुपरान्त परिसीमन अभ्यास के जरिए बारी बारी से विशेष क्रम में लाया जाएगा।

वर्तमान में लोकसभा सदस्यों की संख्या ५४२ है जिसमे से ७८ महिला सदस्य हैं जो लगभग कुल सदस्यों का १४.३९ प्रतिशत है।  पिछले वर्ष के संसद सत्र में  संसदीय प्रश्न के दौरान सरकार ने कहा था कि देश में सभी राज्यों के विधानमंडल आंकड़ों के अनुसार महिला विधायको की संख्या सिर्फ ८ प्रतिशत तक है।
अब इस बिल के आ जाने से राज्यों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ेगी।

बुधवार को लोकसभा में उपस्थित ४५६ सांसदो के बीच दो सदस्यों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध में मत दिया था। हालांकि गुरुवार को राज्य सभा में मौजूद सभी २१४ सांसदों ने इस के पक्ष में ही मतदान किया।
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही अब यह माहिया आरक्षण बिल,  कानून का रूप ले लेगा।

कब तक होगा लागू?

 अब इसे लागू करने के लिए पहले जन गणना, सीटों के परिसीमन का काम भी होगा। फिलहाल यह २०२४ के आम चुनाव तक लागू हो, इसकी संभावना कम है और यह आरक्षण २०२९ के आम चुनाव में लागू हो जाएगा।
१२८ संशोधन अधिनियम के तहत नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सभी राज्यों के विधान मंडलों से भी स्वीकृति की आवश्यकता है।
केंद्र सरकार ने कहा कि अगले साल से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।









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