झोपड़ा धारकों को भाड़े की रकम बाकी रखना अब पड़ेगा बिल्डरों को भारी/ SRA हुआ सख्त/ मुख्य अधिकारी सतीश लोखंडे ने जारी किया परिपत्रक
SRA के नियमावली के अनुसार, जब तक इमारत निर्माण न हो जाए तब या तो बिल्डर द्वारा संक्रमण शिबिरो यानी अस्थाई निवास व्यवस्था देना होता है या सुनिश्चित किए गए मासिक भाड़े के हिसाब से उन्हे किराया तब तक देना होता है जितने समय में वह इमारत बनाकर देने का करार करते हैं।
SRA के रिकॉर्ड के अनुसार कई बिल्डरों द्वारा लगभग ६२० करोड़ किराया की राशि बकाया है जो झोपड़ा धारकों को नही दिया गया।
इसी संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय में दो अलग अलग मामलो में सुनवाई चली जिसमे माननीय न्यायालय ने नाराजगी जाहिर की है।
अब झोपड़ पट्टी पुनर्विकास प्राधिकरण यानी SRA के मुख्य अधिकारी सतीश लोखंडे ने कार्यकारी अभियंताओं को यह भाड़े की बकाया राशि वसूलने की जिम्मेदारी दी है। इसके लिए बिल्डरों के प्रॉपर्टी को जप्त किए जाने तक के उपाय पर विचार किया जा रहा है।
दूसरी ओर SRA द्वारा जारी परिपत्रक में कहा गया है कि जब तक स्लम के रहवासियों को उनका घर बनाकर नही मिलता तब तक बिल्डरों द्वारा अन्य ग्राहको को फ्लैट बेचने वाली बिल्डिंग बनाने की स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
करार पत्र एवम सुधारित करार पत्र को स्वीकृति देने के संबंध में शर्त रखी जा रही है कि रहवासियों को परमानेंट स्वरूप में संक्रमण शिविर देने जैसी व्यवस्था का करार करना ही होगा।
इसके अतिरिक्त यह भी नियम लगाए जा रहे हैं कि किराया बाकी रखनेवाले बिल्डरों, उनकी कंपनियां, उप कंपनियां, संचालक मंडल के सदस्यों को भविष्य में किसी भी अन्य तरह के SRA विकास प्रस्ताव में भाग लेने का मौका नहीं दिया जा सकेगा।
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