आदित्य ठाकरे व दादा भुसे की नाशिक में सीक्रेट मीटिंग; राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा
कल शनिवार के दिन उद्धव ठाकरे शिवसेना गुट के नेता व युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे नाशिक दौरे पर थे।
कल के ही दिन नाशिक के पालकमंत्री एवम राज्य कैबिनेट में सार्वजनिक बंधकाम मंत्री दादा भुसे भी मौजूद थे। इन दोनो नेताओं की गुप्त मीटिंग की चर्चा राजनीतिक गलियारों से लेकर कई अखबारों /इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सुर्खियों में हैं।
बाएं से दादा भुसे ( राज्य में सार्वजनिक बांधकाम मंत्री), युवा सेना अध्यक्ष एवम पूर्व राज्य पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे
राकांपा नेता नवाब मलिक हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वास्थ्य कारणों के चलते २ महीने की अंतरिम एवम सशर्त जमानत पर रिहा हुए हैं, वह अस्पताल से घर आए हैं और लगातार कई नेता उनके घर मिल रहे हैं। इसी कड़ी में कल शरद पवार राकांपा गुट के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल भी नवाब के घर गए और हाल चाल लिया। नवाब के घर से निकलते ही जयंत पाटिल को मीडिया ने घेर लिया और आदित्य ठाकरे दादा भुसे की सीक्रेट मीटिंग के बारे में पूछ लिया।
जयंत पाटिल ने कहा कि उन्हें इस गुप्त मीटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है , वह इसकी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। हालांकि हर व्यक्ति अपने घर ही वापस आने की अंतिम कोशिश करता है। हो सकता है उनके( उद्धव खेमे) से निकले हुए नेताओं में से कुछ घरवापसी करना चाहते हों।
गौरतलब हो कि राकांपा के अजीत पवार व उनके समर्थकों द्वारा राज्य की शिंदे फडणवीस सरकार में शामिल होने के बाद विधान भवन में शिंदे पक्ष के जो नेता पहली पंक्ति में बैठ रहे थे अब दूसरी पंक्ति में आ गए हैं और यह कई नेताओं के लिए कदाचित उपेक्षा लग रही है।
सदन में पहली पंक्ति में पहले गुलाबराव पाटिल, दादा भुसे, संजय राठौड़ बैठते थे लेकिन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार फैक्टर के बाद अब पहली पंक्ति में स्वयं अजीत पवार, हसन मुश्रिफ, दिलीप वलसे पाटिल होते हैं।
शिंदे समूह वाली शिवसेना के कई विधायक इस आस में थे कि अब होने जा रही कैबिनेट विस्तार में उन्हे मंत्री बनने का मौका मिल सकता है, लेकिन अब यह सिर्फ विफल होती निराशा के रूप में दिख रही है।
हाल ही में अजीत पवार ,चाचा शरद पवार से भी १ घटे के लिए मिले थे। खबरें भी चली कि शरद पवार को भाजपा के साथ होने के लिए उन्हे मनाने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर अजीत पवार एवम समर्थक विधायकों के राज्य सरकार में शामिल होने के बाद एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना के कई विधायको को मंत्री पद की आस मुठ्ठी से रेत के समान फिसलती हुई दिखाई दे रही है।
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