संसद के मानसून सत्र में पेश हुए 25 विधेयक, पास हुए 23; जानिए कौन से बिल हुए पास!
राष्ट्रीय
लोकसभा में २० विधेयक , जबकि राज्यसभा में ५ विधेयक पेश किए गए।
कई विधेयकों पर कोई खास चर्चा ही नही हुई और ध्वनि मत से पास हुए।
संसदीय कार्यमंत्री प्रल्हाद जोशी ने आरोप लगाया कि विपक्ष अपने निजी कारणों, स्वभाव वश किसी भी मुद्दे पर चर्चा से बचता रहा।
इस मानसून सत्र में जन विश्वास बिल, मीडिएशन, डेंटल कमीशन बिल, आदिवासियों से जुड़े बिल, डिजिटल डाटा प्रोटेक्शन बिल, नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बिल , कोस्टल एक्वा कल्चर से जुड़े बिल इत्यादि पास किए गए।
कोस्टल एक्वा कल्चर बिल मछुआरों के फायदे से जुड़ा था जिसका सर्वाधिक लाभ केरल को होगा।
नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, युवाओं के लिए वैज्ञानिक शक्ति के रूप में आशाओं को नई दिशा देने के लिए लाया गया बिल था, विपक्ष को इससे भी ऐतराज रहा।
आगामी समय तक संसाधनों से चलने जा रहा है इसलिए डाटा प्रोटेक्शन बिल लाया गया।
संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सहयोगी सांसदो के साथ मिलकर संसद परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया, आरोप लगाया कि संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, सांसदों को धमकी दी जा रही है। मोदी जी संविधान के तहत सदन नही चलने देना चाहते। सांसदों को धमकी देकर उन्हें निष्कासित किया जाता है।
बता दें कि गुरुवार को आप नेता राघव चढ्ढा एवम कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी को निलंबित कर दिया गया था।
दिल्ली सेवा विधेयक पास किया गया जिस पर लोकसभा में पांच घंटे और राज्यसभा में ८ घंटे तक बहस हुई थी। इस विधेयक पर हुई चर्चा में ५८ सांसदों ने हिस्सा लिया था।
विरोधी पक्ष ने हंगामा किया और बाद ने यह बिल पास होने से पहले वॉक आउट कर लिया था। १३१ सांसदो ने पक्ष में जबकि १०२ सांसदों ने बिल के विरोध में मतदान किया था। अब इस कानून के बनने के बाद दिल्ली में अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग से जुड़े अहम फैसले दिल्ली की आप सरकार नही ले सकेगी बल्कि यह भी केंद्र सरकार के निर्देश पर होगा।
संसद में लगातार हंगामे के बीच पारित चार विधेयकों को मंजूरी दे दी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से दो बिल, जो अब कानून बन गए हैं, का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था।
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