संसद के शीतकालीन सत्र की हुई शुरुआत। बहुराज्य सहकारी समिति, एंटी पायरेसी बिल, वन्य जीव संरक्षण विधेयक पर हुई चर्चा। 17 दिनों तक चलेगा सत्र
आज से संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हो गई है।
पहली बार उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद के उच्च सदन में सभापति के रूप में संबोधित किया।
इस सदन में इस बार कुल 19 विधेयक पेश होने हैं जिनमे तीन पहले के हैं और १६ नए हैं।
सत्र की पूर्व संध्या पर ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई थी जिनमे प्रमुख ४१ पार्टियों में से ३७ पार्टियों ने उपस्थिति दिखाई। केंद्र सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संसद सत्र के देरी से शुरू किए जाने पर भी सफाई दी। आवाहन करते हुए जोशी ने कहा कि सरकार सभी पार्टियों के सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है बशर्ते वह न्यायिक प्रक्रिया और प्रावधानों के तहत उठाए जाएं। आम तौर पर शीतकालीन सत्र नवंबर के आखिरी सप्ताह तक शुरू हो जाते हैं।
बायोलॉजिकल डायवर्सिटी बिल, एंटी मैरीटाइम पायरेसी बिल, २०१९ जिन्हे बाह्य मामले के मंत्रालय के अंतर्गत स्थायी समिति में भेजा गया था , उन्हे भी इस बार पेश किया जाएगा। मेडियशन बिल ,२०२१ भी इस बार पेश हो रहा है।
जोशी ने कहा कि उन्हें विपक्ष और अन्य पार्टियों द्वारा पूछे जाने वाले मुद्दों की सूची मिल चुकी है और वह अवलोकन कर रहे हैं कि कौन से मुद्दे लिए जा सकेंगे जिस पर चर्चा हो सके। सूची में कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर पहले भी चर्चा हुई है।
लोकसभा में केंद्रीय मंत्री बी एल वर्मा ने बहुराज्य सहकारी समिति विधेयक पेश किया। एंटी मेरीटाइम पायरेसी बिल पर भी चर्चा हुई है। राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेशनीति पर बयान दिया ।
पर्यावरण, वन एवम जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन्य जीव संरक्षण संशोधक विधेयक, २०२२ पर विचार करने और पारित करने के लिए पेश किया।
इस सत्र में जी२० से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी और चर्चा होगी ताकि सभी को इस की जानकारी मिल सके। उल्लेखनीय है कि इस बार भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर २० शक्तिशाली राष्ट्रों के समूह G २० समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
गृहमंत्रालय ने लिखित जानकारी संसद के उच्च सदन में दी है कि २०१७ से २०२१ तक कुल ६६७७ संस्थानों के FCRA लाइसेंस निरस्त किए गए हैं।
FCRA वह लाइसेंस है जिसके तहत भारतीय संस्थानों को विदेशों से डोनेशन मिलता है ।
सत्र को कल सुबह ११ बजे तक के लिए स्थगित किया गया है।
२९ दिसंबर तक चलनेवाले इस सत्र में विपक्ष केंद्र सरकार को मंहगाई, नौकरी, चीन सीमा विवाद , EWS कोटा, सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के बीच न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर मतभेद, चुनाव आयुक्तों के नियुक्ति की प्रक्रिया, केंद्रीय एजेंसियों का कथित तौर पर राजनेताओं के विरुद्ध हो रहे इस्तेमाल, अर्थव्यवस्था आदि मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।
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