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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर विशेष

आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्म जयंती है।
रामधारी सिंह दिनकर हिंदी जगत के उन चुनिंदा महान साहित्यकारों, कवियों  में आते हैं जिनके नाम पर एक युग का इतिहास दर्ज है।

यह क्रन्तिकारी कवि रहे। तत्तकालीन पश्चिम बंगाल ब्रिटिश प्रेसीडेंसी  और आज के बेगूसराय ,बिहार में जन्मे रामधारी सिंह ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया, आंदोलनकारियों के लिए उनकी कविता मशाल की तरह अग्नि बनी। बाद में वे भले ही महात्मा गांधी से प्रेरित हुए और अहिंसा की ओर झुके पर वह स्वयं को बुरा गांधी मानते थे क्यों कि क्रांतिकारियों के  स्वतंत्रता प्राप्ति में उठाये गए हिंसक कदम को भी वह आवश्यक मानते थे।

उनकी रचित महाकाव्य रश्मिरथी जो महाभारत के घटनाक्रम पर आधारित काव्य संकलन है, में उन्होंने युद्ध का समर्थन करते हुए लिखा है कि यद्यपि युद्ध से विनाश होता है पर भविष्य की स्वर्णिम स्वतंत्रता के लिए यह जरूरी भी है।
रामधारी की कविताएं रवींद्रनाथ टैगोर गुरुजी से प्रेरित रहीं हैं।

वह राजनीति में भी आये। भारत सरकार ने 1952 से 1964 तक तीन बार उन्हें राज्यसभा में भेजा। राजनीति में वह कार्ल मार्क्स से प्रेरित थे। 1959 में पद्म भूषण देश का सर्वश्रेष्ठ तीसरा सम्मान भी मिला। 1956 में साहित्य अकादमी और 1972 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
काव्य जगत में उन्हें दिनकर उपनाम से जाना जाता है।

वह सांसद रहने के दौरान राष्ट्रीय नेताओं राजेन्द्र प्रसाद,  अनुग्रह नारायण सिन्हा, श्री कृष्ण सिन्हा, हिंदी के महान साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी जैसे महान व्यक्तियों के समकक्ष ही रहे। 1960 के दौरान तो वह बिहार के भागलपुर विश्वविद्यालय के उप कुलपति भी रहे।

देश मे आपातकाल के दौरान भारी भरकम लाखों की सभा मे लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने दिनकर की काव्य पंक्ति से सभा की शुरुआत की थी:
" सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।'
दिनकर की कविताएं वीर रस दे ओतप्रोत हैं। उर्वशी महाकाव्य वीर रस का अपवाद जरूर रहा  पर रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा, हुंकार् यह सभी वीर रस के साक्षी हैं। महाभारत का शांति पर्व - कुरुक्षेत्र भी दिनकर की अमर रचनाओं में से है। हरिवंशराय बच्चन, बेनीपुरी, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी,  सभी दिनकर की रचनाओं, विधाओं के कायल रहे।
 दिनकर ,कविराज भूषण के समय मे भी वीर रस के लिए प्रख्यात रहे।

रश्मिरथी तो महाभारत के महान पात्र और ज्येष्ठ पाण्डुपुत्र दानवीर कर्ण पर आधारित महान रचना है।

कृष्ण जब शांतिदूत बनकर कौरवों के पास शांति की पहल के लिए गए और दुर्योधन ने उन्हें बंदी बनाने का आदेश दिया - उस घटना पर रश्मिरथी में जो रचना दिनकर ने लिखी वह आज भी देश के महाविद्यालयों में पढ़ाई जाती है।
 
राष्ट्र ऐसे महान साहित्यकार  ,महाकवि रामधारी सिंह दिनकर को नमन करता है।






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