0 महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में १८ लोगों को मिला मंत्री पद/ दूसरे राउंड का विस्तार सितंबर में - एकनाथ शिन्दे, मुख्यमंत्री - Khabre Mumbai

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महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में १८ लोगों को मिला मंत्री पद/ दूसरे राउंड का विस्तार सितंबर में - एकनाथ शिन्दे, मुख्यमंत्री

आज राजभवन में महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में  विस्तार करते हुए भाजपा के 9 और बागी शिवसेना ग्रुप के 9 विधायकों को मिलाकर कुल 18 मंत्री बनाए गए हैं।

महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील,  पूर्व में मविआ सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत,  संजय राठौड़ को कैबिनेट मंत्रालय में जगह मिल गई है।

हालांकि संजय राठौड़ के फिर से मंत्री बनने को लेकर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष चित्र ताई बाघ ने विरोध जताया है । वाघ के अनुसार पुणे के हड़पसर क्षेत्र में स्थित एक फ्लैट की बालकनी से गिरने की वजह से पूजा चव्हाण की मौत हो गई थी । इस संदर्भ में बहुत से ऑडियो क्लिप और फोटो वायरल हुए थे जिनका सीधा संबंध संजय राठौड़ की तरफ इशारा कर रहा था।
 पूजा चव्हाण परली- बैजनाथ ,बीड़ की रहने वाली थी। चित्र ताई वाघ ने कहा है कि संजय राठौड़ भले ही महाराष्ट्र में मंत्री बन गए हैं पर उनका विरोध  उसके बावजूद भी जारी रहेगा।

कैबिनेट में किन्हें मिली जगह-

चंद्रकांत पाटिल- 
पाटिल 2019 से भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हैं वह पुणे के कोठरूद विधान सभा क्षेत्र से आते हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं विद्यार्थी जीवन से ही भाजपा की विद्यार्थी इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संलग्न रहे हैं। 63 वर्षीय चंद्रकांत दादा पाटील भाजपा में वरिष्ठ नेता के रूप में जाने जाते हैं।
सुधीर मुनगंटीवार - राजनीतिक जीवन विस्तृत रहा है महाराष्ट्र सरकार में पहले वित्त मंत्रालय भी संभाल चुके हैं 1995 में जब पहली बार शिवसेना भाजपा की सरकार राज्य में बनी थी उस समय भी सुधीर मुनगंटीवार को ग्राहक संरक्षण एवं पर्यटन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था। 1980 में भारतीय जनता युवा मोर्चा महाराष्ट्र प्रदेश का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था इनका भी आर एस एस से गहरा संबंध है।

सुधीर मुनगंटीवार मंझे हुए नेता है और 1989 1991 मैं महाराष्ट्र के ही चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।  हालांकि उल्लेखनीय है कि वे दोनों बार संसदीय चुनाव हार गए थे। 1995 में विधानसभा चुनाव में उनकी जीत हुई और पहली बार शिवसेना भाजपा युती की सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया।

गिरीश महाजन-
कभी पराजय का मुंह न देखनेवाले नेता है जो जलगांव के जामनेर विधानसभा से ६ बार लगातार विधायक रहे हैं। गिरीश जमीन से जुड़े रहे हैं और बिल्कुल निचले स्तर से उठे हैं। ग्राम पंचायत और तालुका का प्रतिनिधित्व किया है। विद्यार्थी इकाई- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी शुरू से ही जुड़े रहे हैं।

राधाकृष्ण विखे पाटिल-  शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल के कर्ता धर्ता श्री पाटिल नाशिक के शिरडी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।  वह पहले राकांपा में थे, २०१९ में भाजपा का दामन थाम लिया। सहकारिता क्षेत्र से भी जुड़े हैं।

सुरेश  भाऊ दगड़ू खडे- 
भाजपा कोटे से दलित समाज का नेतृत्व करते हैं। सांगली के मिराज विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। 1999 में रिपब्लिकन पार्टी से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करनेवाले सुरेश खडे ने बाद में भाजपा का साथ लिया और 2004 का चुनाव जीता। दलित समाज के बड़े चेहरे के नाते चर्चित होने के बावजूद इन्हें २०१४ में मौका नही मिला था।

अतुल सवे- औरंगाबाद पूर्व विधानसभा से हैं और दो बार विधायकी जीते हैं। पहली बार २०१४ मे विधायक बने और देवेंद्र फडणवीस की सरकार में मंत्री भी बने। भाजपा को उम्मीद है कि आगामी मनपा चुनाव में औरंगाबाद में अतुल सवे से काफी फायदा हो सकता है।


रविन्द्र चव्हाण-  भाजपा से प्रदेश महासचिव और डोम्बिवली पश्चिम के विधायक रविन्द्र चव्हाण को भी मंत्रालय में जगह मिली है।

मंगल प्रभात लोढा- भाजपा के मुम्बई अध्यक्ष की कमान संभाल रहे विधायक लोढा जाने माने भवन निर्माता हैं और मैक्रोटेक डेवेलेपर्स ( पूर्व नाम- लोढा डेवेल्पर्स) के कर्ता धर्ता हैं। यह भी मंत्री बने हैं। सदन में अपनी बेबाक बात रखने के लिए जाने जाते हैं।

शिवसेना के नेता जिन्हें मिला मंत्रालय-

दादाजी भुसे-  नाशिक के मालेगांव से चार बार विधायक रहे ५८ वर्षीय दादाजी भुसे ने आज मंत्री पद संभाला है। वह मविआ सरकार में भी कृषि मंत्रालय संभाल रहे थे। 

शम्भू राजे देसाई- महाराष्ट्र के सातारा जिले से आते हैं और पाटण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उद्धव सरकार में वह गृह राज्य(ग्रामीण), वित्त, योजना,  राज्य एक्साइज, मार्केटिंग, कौशल विकास, वाशिम जिले के पालक मंत्री रह चुके हैं। इन्होंने भी बगावत करते हुए उद्धव सरकार और आरोप लगाया था कि भले ही उन्हें मंत्री बनाया गया था पर उनके पास कोई पावर नही दिया गया था।

संदीपन भूमरे- मविआ सरकार में हॉर्टिकल्चर मंत्रालय संभाल चुके संदीप भूमरे औरंगाबाद के पैठण विधानसभा का नेतृत्व करते हैं। एकनाथ शिन्दे के करीबी माने जाते हैं और शिवसेना से बगावत के दौरान शुरू से ही मुख्यमंत्री शिन्दे के साथ रहे हैं। इन्हें शिन्दे- फडणवीस सरकार  में फिर मौका मिला है।

उदय सामंत- पहले राकांपा में थे, बाद में शिवसेना में आए और उद्धव सरकार में उच्च तकनीकी शिक्षण मंत्रालय मिला। कोंकण के रत्नागिरी से आते हैं और इस बार भी मंत्री बने हैं। इन्होंने शिन्दे गुट को काफी देर बाद जॉइन किया था।

तानाजी सावंत-  शिवसेना से पहली बार वविधान परिषद सदस्य 2016 में बने। २०१४-१९ तक राज्य के जल संरक्षण मंत्री रहे। उस्मानाबाद के परांदा विधानसभा से विधायक रहे पर उद्धव सरकार में मंत्री पद नही मिला जिसके बाद से लगातार नाराज रहे और शिवसेना की सभाओं का बहिष्कार किया। एकनाथ शिन्दे के साथ बगावत करनेवाले ५८ वर्षीय सावंत पहले नेताओं में से हैं।

दीपक केसरकर- पहले शारद पवार के राकांपा से जुड़े रहे फिर शिवसेना में प्रवेश किया। केसरकर कोंकण के  सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी क्षेत्र से आते हैं। यहीं से 2009 में राकांपा की टिकट ओर चुनाव लड़ा और जीता था। 2014 में शिवसेना की सीट से लड़े और जीते।

( गुलाबराव पाटिल)

 (अब्दुल सत्तार)

(संजय राठौड़)

गुलाबराव पाटिल, अब्दुल सत्तार, संजय राठौड़ इन विधायको को भी मंत्रालय दिया गया है।












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