0 पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को लिखा पत्र- सुझाया वैक्सीनशन तीव्र गति से किया जाए। फ्रंट लाइन सेवको की उम्र सीमा ४५ जरूरी नही। ऑटो बस चालक, पंचायत के लोग भी फ्रंट लाइन वर्कर- दवा कम्पनियों को एक ही नियम के तहत वैक्सीन निर्माण की मिले मंजूरी-वैक्सीन उत्पादन बढ़ाया जाए। - Khabre Mumbai

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को लिखा पत्र- सुझाया वैक्सीनशन तीव्र गति से किया जाए। फ्रंट लाइन सेवको की उम्र सीमा ४५ जरूरी नही। ऑटो बस चालक, पंचायत के लोग भी फ्रंट लाइन वर्कर- दवा कम्पनियों को एक ही नियम के तहत वैक्सीन निर्माण की मिले मंजूरी-वैक्सीन उत्पादन बढ़ाया जाए।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने देश में बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

 गौरतलब हो कि कल पिछले 24 घंटे में पूरे देश में  २.६१ लाख संक्रमण के मामले आए थे जो अब तक का सर्वाधिक मामला है / अब देश में डेढ़ करोड़ के लगभग संक्रमित मामलों की संख्या हो चुकी  है।

डॉ सिंह ने पत्र के माध्यम से कहा है फ्रंटलाइन वर्करों की आयु सीमा 45 वर्ष से कम कीजिए। जरूरी नहीं है कि वह 45 वर्ष या उसके ऊपर ही हैं  जो फ्रंटलाइन सर्विसेस में काम कर रहे हैं।
 हॉस्पिटल के डॉक्टर , नर्स , टेक्नीशियन,  पुलिस साफ सफाई के कर्मचारी व अन्य सभी  ऐसे लोग फ्रंटलाइन सेवाओं में आते हैं और वे सभी जो जरूरी सेवाएं दे रहे हैं उन सभी का वैक्सीनेशन ड्राइव किया जा रहा है/  डॉ सिंह ने कहा कि बस ड्राइवर, ऑटो- टैक्सी ड्राइवर, पंचायत के लोग, मनपा के स्टाफ सभी फ्रंटलाइन सेवा में शामिल किए जाने चाहिए।

 डॉ सिंह ने कोरोनावायरस के वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाए जाने के संदर्भ में सुझाव देते हुए कहा है कि भारत में बहुत सी फार्मा कंपनियां हैं। उन सभी को एक ही नियम के तहत वैक्सीन निर्माण की मंजूरी दे दी जानी चाहिए। जिससे वैक्सीन का निर्माण अधिक से अधिक मात्रा में हो सके और यह समय की मांग है।  उन्होंने इस बारे में पिछली बार एचआईवी यानी एड्स के समय  में भी इसी तरह की मंजूरी दिए जाने का उल्लेख किया है।

डॉ सिंह ने आगे अपने पत्र में उल्लेख किया है कि ऐसी कोई भी वैक्सीन/ दवा जो यूरोपियन मेडिकल एजेंसी या अमेरिकन एफडीए जैसी विश्वसनीय संस्था के द्वारा मान्यता ले चुकी हो और वहां उपयोग हुआ हो ; उनका तत्काल रूप से भारत में उपयोग किए जाने की स्वीकृति दे दी जानी चाहिए और ऐसी दवाओं के लिए किसी भी प्रकार का ट्रायल किए जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

डॉ सिंह ने आगे उल्लेख किया है कि हमें इस वक्त कितने प्रतिशत भारतीय कोरोना का टीका लगवा चुके हैं, इस पर विचार करने के बजाए कितने लोग सांख्यिक रूप से टीका लगवाए है , इस पर ध्यान देने की ज्यादा जरूरत है।

गौरतलब हो कि  अब तक महज 7% के लगभग भारत के लोग टीका लगवा चुके हैं।

डॉ सिंह ने कहा कि उन्हें  पूरा भरोसा है कि यदि सही तरीके से रणनीति पर काम किया गया तो हम बहुत ही अच्छा और अपेक्षा से भी ज्यादा काम कर सकते हैं।

डॉ सिंह ने एक और बात का उल्लेख किया है कि यदि अगले छह महीनों में हमारे पास अधिक से अधिक वैक्सीन लगवाने का टारगेट हो तो उसके हिसाब से हमें एडवांस में अधिकतम ऑर्डर भी दे देना चाहिए ताकि समय पर वैक्सीन की सप्लाई में कोई रुकावट ना आए। डॉ सिंह ने अपने पत्र में यह भी लिखा है राज्यों को उनके स्तर पर यह सुनिश्चित करने का समय दिया जाए कि किन-किन लोगों को फ्रंटलाइन  वर्कर की श्रेणी में रखा जाना है।

आपको बता दें कि पिछले 15 अप्रैल 2021 से लगातार दो लाख से अधिक नए संक्रमण के मामले भारत में आ रहे हैं। कोरोना के नए स्ट्रेन भी मिल रहे हैं और यह दूसरी लहर मानी जा रही है ।कई जानकारों का यह दावा है कि कोरोनावायरस की लहर पिछले वर्ष की पहली लहर की अपेक्षा अधिक घातक और मारक है। अब तक संक्रमित लोगो की कुल संख्या १.४७ करोड़ के लगभग हो चुकी है।  केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग  द्वारा निर्देशित जानकारी के अनुसार पिछले २४घंटो में देश मे  कोरोना संक्रमण से मृत लोगो की संख्या १५०१ तक पहुंच गई। इस प्रकार अब तक मृत आंकड़ा १,७७,१५० तक जा पहुंचा है।

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