राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महाराष्ट्र सरकार ,राज्य के सचिव और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को भेजा नोटिस- भंडारा अस्पताल हादसे पर 4 हफ्ते के अंदर मांगी रिपोर्ट/
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुओ मोटो यानी स्वतहः संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र में नागपुर से 65 किलोमीटर दूर भंडारा जिला सरकारी अस्पताल में हुई आग की घटना से 10 नवजात बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार राज्य सरकार सचिव और राज्य पुलिस महानिदेशक डीजीपी को नोटिस भेज दिया है और 4 हफ्तों में इस मामले पर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने नोटिस में सरकार से पूछा है कि अस्पतालों का फायर ऑडिट नजरअंदाज करने के पीछे जिन अधिकारियों की भूमिका होती है उनके लिए सरकार क्या कर रही है ताकि वह अपनी जिम्मेदारी से न भाग सकें।
क्या सिर्फ पीड़ित परिवार को मुआवजा देने मात्र से सरकार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। सरकारी अस्पताल में इतनी बड़ी घटना का घटना सरकार की लापरवाही दर्शाती है ।राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती ।अस्पताल के अंदर लगे उपकरण की सक्रियता पर अस्पताल प्रशासन को खबर रखनी चाहिए।
राज्य पुलिस महानिदेशक को नोटिस के अनुसार मानवाधिकार आयोग को 4 हफ्ते के अंदर यह बताना होगा कि उनकी पुलिस टीम ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है साथ ही साथ उन्हें अपनी रिपोर्ट में राज्य सरकार के अंदर मौजूद विभिन्न अस्पतालों के फायर ऑडिट रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।
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