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राजकीय सम्मान के साथ किया जाएग नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार : महाराष्ट्र शासन

देश ने आज एक उम्दा सबके चहेते और दिग्गज बॉलीवुड कलाकार को खो दिया है।

महाराष्ट्र सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया है। शासन ने कहा है कि अंतिम संस्कार की जगह परिवार चुने कि मुंबई में करना या पुणे में, वह उनका फैसला होगा।
पीएम मोदी समेत दिग्गज नेताओं ने दुख जताया है।
बॉलीवुड हस्तियों ने भी शोक प्रकट किया है।
गरीबी से निकलकर प्रसिद्ध अभिनेता की यात्रा तय करनेवाले चंद कलाकारों में से एक नाना पाटेकर रहे।

आज सुबह ५.२० बजे गोवा के मणिपाल अस्पताल में ऑनकॉलजी डिपार्टमेंट के प्रमुख सालकर ने उनके निधन की औपचारिक घोषणा की। २.३० बजे मित्र को नाना ने मैसेज किया था, देती से देखा था संदेश। परिजन उन्हें अस्तपाल ले गए जहां ४५ मिनट तक CPR देने के बावजूद कोई हलचल नहीं हुई।
नाना को हृदय आघात हुआ था। वह अपने गोवा के घर में थे।

नाना पाटेकर: अभिनय की बुलंद आवाज, सादगी की मिसाल और किसानों के मसीहा

फिल्मी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता ने ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए सूखाग्रस्त किसानों की मदद में निभाई अहम भूमिका

मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय, बेबाक संवाद अदायगी और सहज व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर भारतीय फिल्म जगत की विशिष्ट हस्तियों में शामिल हैं। पर्दे पर कभी सख्त पुलिस अधिकारी, कभी संवेदनशील इंसान तो कभी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले किरदारों को जीवंत करने वाले नाना पाटेकर ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। फिल्मों के साथ-साथ महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद के लिए किए गए उनके सामाजिक कार्यों ने भी उन्हें व्यापक सम्मान दिलाया है।

शुरुआती जीवन और संघर्ष

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा क्षेत्र में हुआ था। उनका मूल नाम विश्वनाथ पाटेकर है। उन्होंने मुंबई में सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट्स से शिक्षा प्राप्त की। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपनी प्रतिभा तथा मेहनत के बल पर फिल्म जगत में पहचान बनाई।

नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत मराठी रंगमंच और फिल्मों से जुड़कर की। बाद में हिंदी सिनेमा में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट अभिनय शैली से दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। उनकी संवाद अदायगी, चेहरे के भाव और किरदारों में उतर जाने की क्षमता उन्हें दूसरे अभिनेताओं से अलग बनाती है।
इन फिल्मों ने दिलाई खास पहचान

नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं—

- अंकुश (1986): इस फिल्म ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक प्रभावशाली अभिनेता के रूप में पहचान दिलाने में मदद की।
- परिंदा (1989): गैंगस्टर की भूमिका में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली।
- प्रहार (1991): इस फिल्म में उन्होंने सैनिक की भूमिका निभाने के लिए विशेष तैयारी की।
- तिरंगा (1993): उनके दमदार संवाद और अभिनय दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।
- क्रांतिवीर (1994): इस फिल्म में उनकी भूमिका और संवाद अदायगी ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
- अग्नि साक्षी (1996): एक जटिल और नकारात्मक किरदार में उनके अभिनय की प्रशंसा हुई।
- खामोशी: द म्यूजिकल (1996): इस फिल्म में उन्होंने एक संवेदनशील पिता की भूमिका निभाई।
- वजूद (1998): उन्होंने एक बार फिर अपनी बहुआयामी अभिनय क्षमता का परिचय दिया।
- अब तक छप्पन (2004): एक सख्त पुलिस अधिकारी की भूमिका में उन्हें विशेष पहचान मिली।
- अपहरण (2005): इस फिल्म में उनके अभिनय को समीक्षकों की सराहना मिली।
- वेलकम (2007): गंभीर भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले नाना ने इस फिल्म में हास्य अभिनय से भी दर्शकों का मनोरंजन किया।
- राजनीति (2010): उनके प्रभावशाली अभिनय ने फिल्म को यादगार बनाने में योगदान दिया।

मराठी सिनेमा और रंगमंच में भी नाना पाटेकर का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनकी अभिनय शैली में यथार्थवाद, तीव्र भावनाएं और सामाजिक सरोकार प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री तक का सफर

नाना पाटेकर को उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: उन्हें फिल्म ‘परिंदा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्रदान किया गया। फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में उनके अभिनय के लिए उन्हें विशेष उल्लेख (स्पेशल मेंशन) मिला।

फिल्मफेयर पुरस्कार: उनके अभिनय को फिल्मफेयर पुरस्कारों में भी मान्यता मिली। ‘परिंदा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार उनके प्रमुख सम्मानों में शामिल है।

पद्मश्री: भारत सरकार ने वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। यह देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक है और कला के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देता है।

इन सम्मानों ने अभिनय के क्षेत्र में उनके लंबे और प्रभावशाली सफर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

‘नाम फाउंडेशन’: सूखाग्रस्त किसानों के लिए सेवा का अभियान

नाना पाटेकर के व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका सामाजिक योगदान है। महाराष्ट्र में सूखे, कर्ज के दबाव और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे किसानों की स्थिति ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद के उद्देश्य से उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर वर्ष 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की।

फाउंडेशन ने महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में जरूरतमंद किसानों और ग्रामीण समुदायों की सहायता के लिए काम किया। इसके कार्यों में आर्थिक सहायता, जल संरक्षण, जलसंधारण, ग्रामीण विकास और सूखे से प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने जैसी पहल शामिल रही हैं।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और अन्य सूखाग्रस्त इलाकों में पानी की कमी ग्रामीण जीवन और खेती के लिए गंभीर चुनौती रही है। ऐसे क्षेत्रों में जल संरक्षण तथा ग्रामीण समुदायों को सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों ने ‘नाम फाउंडेशन’ को विशेष पहचान दिलाई।

नाना पाटेकर ने अपनी लोकप्रियता का उपयोग केवल फिल्मी सफलता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का भी प्रयास किया। उनके इस कार्य ने अनेक लोगों को किसान कल्याण और ग्रामीण विकास के लिए योगदान देने की प्रेरणा दी।

सादगी और स्पष्टवादिता के लिए भी चर्चित

नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज और स्पष्ट विचारों के लिए भी जाने जाते हैं। वे अक्सर सामाजिक समस्याओं, किसानों की स्थिति और आम लोगों के संघर्षों पर अपनी राय रखते रहे हैं। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के बीच उनकी सादगी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ाव उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा रहा है।

उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि एक कलाकार की पहचान केवल उसकी फिल्मों और पुरस्कारों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसके दायित्वों से भी बनती है। अभिनय के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ-साथ किसानों और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के प्रयासों ने उन्हें एक विशिष्ट स्थान दिलाया है।

निष्कर्ष: नाना पाटेकर का फिल्मी सफर प्रतिभा, मेहनत और संघर्ष की कहानी है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों और पद्मश्री जैसे सम्मानों से सम्मानित इस कलाकार की पहचान उनके दमदार अभिनय के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी हुई है। ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए किए गए प्रयास उनके जीवन के उस पक्ष को सामने लाते हैं, जो कला से आगे बढ़कर मानवीय संवेदना और सेवा की भावना को दर्शाता है।

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