IIT बॉम्बे में घमासान/ प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को डीन के पद से हटाया गया। आत्महत्या के लिए उकसाने , जातिगत भेदभाव के आरोप, साहिल के माता पिता ने दर्ज कराई प्राथमिकी।
IIT बॉम्बे में छात्र आत्महत्या मामले में प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला पर FIR
ChatGPT से उत्तर तैयार कर परीक्षा में लिखने का आरोप; प्रोफेसर ने पकड़ा तो परीक्षा जारी रखने की अनुमति नहीं दी — प्रशासनिक डीन पद से निलंबन की जानकारी, प्रोफेसर पद पर कार्रवाई अभी स्पष्ट नहीं
मुंबई। IIT बॉम्बे में 20 वर्षीय बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल, जो महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला बताया जा रहा है, की आत्महत्या के प्रयास के मामले ने संस्थान में गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। घटना 18 सितंबर की बताई जा रही है। मामले में IIT बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ छात्र के परिवार की शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने और जातिगत भेदभाव से संबंधित आरोपों के तहत FIR दर्ज की गई है।
घटना के केंद्र में परीक्षा के दौरान ChatGPT के कथित इस्तेमाल का मामला है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, साहिल परीक्षा के दौरान ChatGPT की मदद से उत्तर तैयार कर उन्हें परीक्षा में लिख रहा था। उस समय प्रो. दुल्ला परीक्षा के परीक्षक (Examiner) थे। उन्होंने कथित तौर पर छात्र को ChatGPT के जरिए उत्तर तैयार करते और उसकी नकल करते हुए पकड़ा तथा उसे परीक्षा आगे जारी रखने की अनुमति नहीं दी और परीक्षा कक्ष से बाहर जाने का निर्देश दिया।
इसके बाद 18 सितंबर को छात्र द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद छात्र के परिजनों ने प्रो. दुल्ला पर अपने बेटे के साथ कथित जातिगत भेदभाव करने तथा उसके खिलाफ ऐसा व्यवहार करने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने आत्महत्या के लिए उकसाने से जोड़ा है। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
प्रशासनिक डीन पद से हटाए जाने की जानकारी
इस बीच IIT बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे की ओर से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को ई-मेल किए जाने की जानकारी सामने आई है। ई-मेल में प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला को Administration Head/Dean (Administrative Affairs) की जिम्मेदारी से निलंबित किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, प्रोफेसर के रूप में उनकी शैक्षणिक/फैकल्टी जिम्मेदारियों से भी निलंबन हुआ है या नहीं, यह स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इसलिए प्रशासनिक पद से हटाए जाने और प्रोफेसर के पद से निलंबन को एक ही कार्रवाई मानना उचित नहीं होगा।
छात्रों का प्रदर्शन और कैंपस में आक्रोश
घटना के बाद IIT बॉम्बे परिसर में छात्रों के बीच आक्रोश देखने को मिला और छात्र प्रदर्शन भी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच, छात्र की शिकायतों पर कार्रवाई और संस्थान में जातिगत भेदभाव की शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग की जा रही है।
दूसरी ओर, परीक्षा में ChatGPT का इस्तेमाल और परीक्षा नियमों का उल्लंघन भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शैक्षणिक संस्थानों में बिना अनुमति AI टूल का इस्तेमाल परीक्षा की शुचिता और अकादमिक अनुशासन से जुड़ा मुद्दा है।
आरोपों की जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि परीक्षा में ChatGPT के कथित इस्तेमाल, छात्र को परीक्षा से रोकने और उसके बाद आत्महत्या के प्रयास के बीच कानूनी रूप से कोई सीधा कारण-सम्बंध था या नहीं, यह जांच का विषय है। इसी तरह छात्र के परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोपों की भी जांच आवश्यक है।
प्रो. दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन होगा।
यह मामला एक साथ अकादमिक अनुशासन, परीक्षा में AI/ChatGPT के इस्तेमाल, छात्रों की शिकायतों, जातिगत भेदभाव के आरोप और संस्थानों में छात्र कल्याण एवं मानसिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाता है।
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