भारत 2030 तक 350 किमी प्रति घंटे रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन स्वनिर्मित करेगा/ जापान को छोड़ेगा पीछे।
350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन!
2030 तक भारत की हाई-स्पीड रेल तकनीक में बड़ी छलांग, मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर बनेगा आधार
मुंबई। भारत हाई-स्पीड रेल के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है। देश में करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति वाली स्वदेशी बुलेट ट्रेन विकसित करने की दिशा में काम तेज किया जा रहा है। प्रस्तावित स्वदेशी ट्रेन का विकास मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर से जुड़ा है और लक्ष्य 2030 के आसपास भारतीय तकनीक से निर्मित हाई-स्पीड ट्रेन संचालन की दिशा में आगे बढ़ना है।
इस परियोजना से भारत का उद्देश्य केवल तेज रफ्तार ट्रेन तैयार करना नहीं, बल्कि हाई-स्पीड रेल के लिए ट्रेनसेट, नियंत्रण प्रणाली, सिग्नलिंग और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में घरेलू क्षमता विकसित करना भी है।
BEML तैयार कर रहा ट्रेनसेट
भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। शुरुआती चरण में स्वदेशी ट्रेनसेट विकसित करने की योजना है, जिसके बाद तकनीक और उत्पादन क्षमता को आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रस्तावित ट्रेन की गति भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क की तुलना में कई गुना अधिक होगी। हाई-स्पीड संचालन के लिए केवल ट्रेन की क्षमता ही नहीं, बल्कि ट्रैक, बिजली आपूर्ति, सिग्नलिंग, सुरक्षा और नियंत्रण प्रणाली का भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना जरूरी होगा।
स्वदेशी कंट्रोल सिस्टम पर भी जोर
हाई-स्पीड रेल परियोजना में भारत स्वदेशी ट्रेन कंट्रोल और संचालन प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य ट्रेन की गति, ब्रेकिंग, सिग्नलिंग और सुरक्षित संचालन को एकीकृत तरीके से नियंत्रित करना है।
स्वदेशी नियंत्रण प्रणाली विकसित होने से भविष्य में भारत को हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
जापान की बुलेट ट्रेन तकनीक से मुकाबले की तैयारी
भारत की प्रस्तावित स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन को जापान की Shinkansen तकनीक के साथ तुलना में देखा जा रहा है। जापान की बुलेट ट्रेनें लंबे समय से अपनी तेज गति, सुरक्षा और समय की पाबंदी के लिए जानी जाती हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना में जापानी तकनीक और E5 सीरीज जैसी हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक का अनुभव भारत के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी आधार तैयार कर रहा है। इसी अनुभव के समानांतर स्वदेशी ट्रेन और प्रणालियां विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
₹2 लाख करोड़ के निवेश का दावा
परियोजना के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा करीब ₹2 लाख करोड़ के फंड/निवेश को मंजूरी दिए जाने की खबर है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर बनेगा तकनीकी प्रयोगशाला
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत में हाई-स्पीड रेल तकनीक के लिए सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। करीब 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर हाई-स्पीड रेल सेवा विकसित की जा रही है।
इस परियोजना के अनुभव से भारत को भविष्य में दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-नागपुर और अन्य प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए तकनीकी क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
स्वदेशी ट्रेनसेट के साथ स्वदेशी नियंत्रण प्रणाली और हाई-स्पीड रेल से जुड़े उपकरणों का विकास सफल होता है तो यह भारतीय रेलवे के लिए केवल एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि हाई-स्पीड रेल की पूरी घरेलू तकनीकी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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