वरुदिनी एकादशी आज, पारण कल सूर्योदय के पश्चात/ भगवान वराह की इस दिन होती है विशेष पूजा अर्चना
इसी दिन भगवान वराह ने अवतार लिया और राक्षसराज हिरण्याक्ष का वध समुद्र में किया तथा पृथ्वी को उस दुष्ट की कैद से मुक्त कर अपने दांतों पर उठाकर जल के ऊपर लाए और पुनः स्थापित किया।
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हिंदू धर्म में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है ! मान्यता है कि इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की आराधना करने से न केवल दुखों का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति भी होती है. साल 2026 में यह व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा |
वर्ष 2026 में वरुथिनी एकादशी का उपवास 13 अप्रैल, सोमवार के दिन किया जाएगा. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 12 अप्रैल की रात से ही हो जाएगा, लेकिन उदयातिथि की महत्ता के कारण व्रत 13 अप्रैल को ही मान्य होगा. इस दिन ग्रहों का विशेष संयोग बनने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाएगा |
व्रत का पारण यानी व्रत खोलने का समय अगले दिन, 14 अप्रैल को सुबह सूर्योदय के बाद रहेगा. पारण हमेशा द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए, तभी व्रत पूर्ण माना जाता है।
(संकलन: आचार्य अजय मिश्र जी, मुख्य पुजारी विहिप संचालित समर्थ हनुमान टेकडी सिद्धपीठ, सायन, मुंबई )
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