मुंबई की ६ सीटों समेत महाराष्ट्र के १३ सीटों के लिए कल पांचवे चरण के चुनाव में वोटिंग
महाराष्ट्र के १३ लोकसभा सीटों के लिए , जम्मू कश्मीर, लद्दाख में एक एक, बिहार में ५, उत्तर प्रदेश में १४ , एवम अन्य राज्यों में कल चुनाव होने जा रहे हैं।




(बाएं से :उज्ज्वल निकम, वर्षा गायकवाड)
( बाएं से भूषण पाटिल, पीयूष गोयल)
१८ वीं लोकसभा के पांचवे चरण के चुनाव के तहत मुंबई की छह एवम मुंबई उपनगरों की ४ संसदीय क्षेत्रों के लिए चुनाव संपन्न होगा।अन्य तीन सीटे महाराष्ट्र के अलग अलग हिस्सों से हैं।
मुंबई की सीटों में तीन में शिवसेना के दोनो गुट आपस में भिड़े हैं जबकि दो पर भाजपा और कांग्रेस आमने सामने हैं और एक पर भाजपा व शिवसेना UBT पक्ष की लड़ाई है।
दक्षिण मुंबई
उत्तर मुंबई
दक्षिण मध्य मुंबई
उत्तर मध्य मुंबई
उत्तर पूर्व मुंबई
उत्तर पश्चिम मुंबई
एमएमआर यानी मुंबई उपनगरों की चार सीटें ठाणे, कल्याण, भिवंडी , पालघर में चुनाव होगा।
दक्षिण मुंबई में उद्धव ठाकरे ने अपने निवर्तमान सांसद अरविंद सावंत को ही मैदान में उतारा है।इस सीट के लिए बड़ी लड़ाई अंदरूनी महाविकस आघाड़ी में चल रही थी, कांग्रेस यहां से लड़ना चाहती थी लेकिन उद्धव , अरविंद सावंत को लेकर अड़े रहे और आखिरकार उन्हें उम्मीदवार भी बनाया।
( बाएं से : भायखला से विधायक एवम सांसद प्रत्याशी यामिनी यशवंत जाधव, निवर्तमान सांसद अरविंद सावंत)
बालासाहेबांची शिवसेना से थोड़ी देरी हुई लेकिन निवर्तमान विधायक भायखला से यामिनी यशवंत जाधव को फील्ड किया। यामिनी को प्रचार करने का समय कम जरूर मिला पर कवर अप कर ही लिया है।
अरविंद सावंत मिनिरत्न सरकारी कंपनी महानगर टेलीफोन निगम के यूनियन अध्यक्ष भी हैं।
(बाएं से : राहुल रमेश शेवाले , अनिल देसाई)
दक्षिण मध्य मुंबई से सीएम एकनाथ शिंदे ने ने लोकसभा में गट नेता और इसी क्षेत्र से दो बार के सांसद राहुल शेवाले को तीसरी बार मौका दिया है।
राहुल शेवाले २०१४ में अविभाजित सेना भाजपा गठबंधन के बैनर तले पहली बार नगरसेवक से सीधे संसद की सीढ़ी चढ़ गए थे। २०१९ में भी वह जीत गए और दिवंगत कांग्रेसी दिग्गज एकनाथ गायकवाड को हराया था।
यहां से पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने अपने विश्वस्त ७१ वर्षीय अनिल देसाई को उतारा है। अनिल देसाई पहली बार संसद का चुनाव लड़ रहे हैं।पर्दे के पीछे राज्यसभा सदस्य के रूप में इन्होंने राजनीति की है और अब इस बार सामने से स्टेज पर हैं। शिवसेना विभाजन के बाद अनिल देसाई पर ५० करोड़ रुपए पार्टी के खाते से ट्रांसफर करने का विवाद सुर्खियों में आया था और ईडी ने घंटो पूछताछ भी की थी। सायन कोलीवाडा, माहिम, चेंबूर, वडाला, मानखुर्द यह सब इसी लोकसभा क्षेत्र में आते हैं।
मुंबई उत्तर पश्चिम से गोरेगांव पूर्व से विधायक अमोल कीर्तिकर को उद्धव खेमे से लोकसभा का टिकट दिया गया है। अमोल के पिता गजानन कीर्तिकर सांसद रहे हैं लेकिन राजनीतिक समीकरण की विवशता देखिए कि अमोल पर एक ओर कोरोना काल में करोड़ों की खिचड़ी घोटाले का आरोप है और ईडी जांच शुरू है दूसरी ओर उद्धव कैंप के ही विधायक रविंद्र वायकर शिंदे सेना का दामन थाम लिए हैं और अमोल के सामने मैदान में खड़े हैं।
(बाएं से : रविंद्र वायकर, अमोल कीर्तिकर)
कुछ दिन पहले ही मीडिया को वायकर ने बताया कि कैसे पंच सितारा होटल अवैध जमीन पर बनाने के चलते उन पर जांच हो रही थी, ईडी ने समन भी दिया जिसके बाद से वह तीन बार उद्धव ठाकरे से मिलकर मदद की गुहार लगाए लेकिन उन्होंने भाव नहीं दिया।जेल जाने के डर से वायकर ने सीएम शिंदे से मदद मांगी तो आश्वासन मिल गया। बस दो ही रास्ते थे या तो शिंदे खेमे में आ जाएं या जेल की हवा खाएं..इसलिए शिंदे सेना को ज्वाइन किया और अब सांसदी लड़ रहे हैं।
अमोल के पिता गजानन १७ वी लोकसभा के संसद सदस्य हैं और उन्होंने इस चुनाव में कांग्रेस के संजय निरुपम को हराया था ।इससे पहले २०१४ में भी उन्होंने लगभग पौने २ लाख से ज्यादा के अंतर से कांग्रेसी दिग्गज गुरुदास कामत को भी हराया था। वह १९९० से दो दशक तक मलाड से विधायक भी रहे। इस प्रकार देखा जाए तो अमोल का राजनैतिक माहौल घर से ही मजबूत रहा है।
मुंबई उत्तर मध्य में कांग्रेस ने अपने मुंबई अध्यक्षा एवम धारावी से चार बार की विधायिका, राज्य महिला एवम बाल कल्याण विकास मंत्री, शालेय शिक्षण मंत्रालय संभाल चुकी दिग्गज वर्षा गायकवाड को टिकट दिया हालांकि इसके लिए वर्षा को आलाकमान तक काफी मेहनत करनी पड़ी थी।वर्षा कोरोना काल में स्वर्गवासी हुए पूर्व दक्षिण मध्य मुंबई से सांसद एवम कभी राज्य के आरोग्य मंत्री रहे एकनाथ गायकवाड की बेटी हैं। इसका फायदा भी शायद इन्हें मिल सकता है।
भाजपा ने यहां से प्रसिद्ध सरकारी वकील उज्ज्वल निकम को उम्मीदवार बनाया है।उज्ज्वल भले ही पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं पर अदालत में कई बड़े बड़े मामले में अपराधियों को सजा दिलाई है। २००८ के मुंबई में आतंकी हमले के एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकी कसाब को इन्ही वकील साहब ने फांसी तक पहुंचाया था। उज्ज्वल जी उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भी चहेते हैं। धुंआधार जोश वाले भाषण से उज्ज्वल निकम ने यह मनवा दिया कि वह राजनीति में नए जरूर हैं पर अनुभवी बहुत हैं। इसका असर भी यह रहा कि वर्षा गायकवाड के प्रचार में पार्टी अध्यक्ष खड़गे से लेकर शशि थरूर तक नजर आए। पहली बार ऐसा होगा कि उद्धव ठाकरे एवम परिवार भी वर्षा के लिए कांग्रेस को वोट करेगा क्यों कि ठाकरे परिवार का क्षेत्र बांद्रा भी इसी लोकसभा क्षेत्र में आता है।
मुंबई उत्तर से भाजपा ने वर्तमान सांसद गोपाल शेट्टी को उम्मीदवारी नही दी बल्कि कैबिनेट मंत्री फायर ब्रांड नेता CA पीयूष गोयल को यहां से उतारा है।पीयूष संसद में पहले वित्त बजट भी पेश कर चुके हैं।
यहां से इनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है क्यों की पियूष गोयल का नाम तो मार्च में ही हो गया और प्रचार भी खूब किया गया जबकि कांग्रेस ने कुछ दिन पहले ही भूषण पाटिल को मैदान में उतार दिया , वह पहले नगरसेवक का चुनाव लड़ चुके हैं। भूषण पाटिल की स्थिति गोयल के मुकाबले कमजोर है। पीयूष माटुंगा में रहे हैं और उनकी विधायिका मां स्वर्गिया चंद्रकांता गोयल भी भाजपा की दिग्गज नेता रही हैं। कांग्रेस की सीट पर लड़ रहे भूषण पाटिल अभिनेता से राजनेता बने हैं।
मुंबई उत्तर पूर्व से इस बार भाजपा ने वर्तमान सांसद मनोज कोटक का टिकट काटकर मुलुंड के विधायक मिहिर कोटेचा को उम्मीदवारी दी है। यहां घाटकोपर में हाल ही में पीएम मोदी का रोड शो भी हुआ।
शिवसेना UBT से कोटेचा के विरुद्ध संजय दीना पाटिल को उतारा गया है ।संजय पाटिल अविभाजित राकांपा में रहे हैं, पार्टी से २००४ में भांडुप के विधायक बने और २००९ में सांसद भी। संजय पाटिल की पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। उनके पिता दीना पाटिल १९८५ में मुलुंड से विधायक रहे। संजय पाटिल ने कांग्रेस के गुरुदास कामत को रिप्लेस कर सांसदी जीती थी पर २०१४ में भाजपा नेता किरीट सोमैया ने उन्हें हरा दिया था।
मुंबई मेट्रो कॉरपोरेश ने कल २० मई को वोटिंग दिन के तहत टिकट पर १० प्रतिशत डिस्काउंट ऑफर किया है।
कल्याण लोकसभा से सीएम शिंदे के सांसद बेटे डॉक्टर श्रीकांत शिंदे फिर मैदान में हैं जबकि उद्धव खेमे से वैशाली दरेकर राणे लड़ रही हैं।वह सचिन राणे की पत्नी हैं और पहले नगरसेविका रही हैं।
ठाणे से वर्तमान सांसद राजन विचारे शिवसेना UBT की सीट से फिर मैदान में हैं और उनका सामना शिंदे सेना के नरेश महस्के से है। नरेश म्हस्के ठाणे मनपा में पहले २०१२ में शिवसेना से नगरसेवक रहे, २०१७ में फिर चुने गए । ठाणे मनपा में सदन के नेता भी रहे और फिर ठाणे मनपा के महापौर के रूप में २०२२ तक कार्य किया।
राजन विचारे २००६ में महापौर रहे ।आनंद दिघे दिग्गज क्षेत्रीय नेता के प्रशंसक रहे हैं। २००९ में ठाणे से विधायक रहे और २०१४ में संजीव नाईक को हराकर सांसद बने थे। २०१९ में दुबारा सांसद बने। बचपन से ही शिवसेना से जुड़े रहे और मध्यम वर्गीय परिवार के राजन विचारे का क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है।नरेश म्हस्के के सामने लड़ाई टक्कर की है।
ठाणे और कल्याण दोनो ही सीएम शिंदे के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है क्यों की ठाणे उनका घर है और कल्याण में स्वयं उनके सांसद सुपुत्र हैं।
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